एक छोटे पहाड़ी Ground से Cricket को देखने का मेरा नजरिया क्यों अलग है?
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| मेरे लिए Cricket की शुरुआत किसी बड़े Stadium से नहीं, बल्कि पहाड़ के एक छोटे से Ground और बचपन की उन साधारण शामों से हुई थी। |
एक छोटे पहाड़ी Ground से Cricket को देखने का मेरा नजरिया क्यों अलग है?
मेरे लिए Cricket की शुरुआत किसी बड़े Stadium, Cricket Academy या महंगे Cricket Kit से नहीं हुई थी। सच कहूँ तो उस समय मुझे शायद यह भी नहीं पता था कि जिस खेल में मैं इतना मजा ले रहा हूँ, वह आगे चलकर मेरी जिंदगी का इतना बड़ा हिस्सा बन जाएगा।
साल शायद 1998–99 रहा होगा और मेरी उम्र लगभग 3–4 साल। मैं अपने बड़े भाई के साथ घर के पास ही Cricket खेलना शुरू कर चुका था।
उस समय हमारे पहाड़ों में आज की तरह हर घर पूरी तरह Concrete का नहीं हुआ करता था। बहुत-से घर लकड़ी, पत्थर और मिट्टी के मिश्रण से बने होते थे। हमारे घर के लकड़ी के बरामदे के नीचे थोड़ी-सी खाली जगह थी।
मेरे लिए वही एक छोटा-सा Cricket Ground था।
बड़े भाई के साथ वहाँ ईंट या लकड़ी को Wicket बनाकर खेलना अपने आप में एक अलग आनंद था। मैं छोटा था, इसलिए शायद मुझे खेल के नियमों की ज्यादा समझ नहीं थी। लेकिन Bat हाथ में लेकर Ball मारने का जो आनंद था, वह समझने के लिए किसी Rule Book की जरूरत नहीं थी।
शायद Cricket का पहला आकर्षण यही होता है।
आप पहले खेल से जुड़ते हैं, बाद में उसके बारे में समझना शुरू करते हैं।
मेरे लिए पहला Cricket Ground किसी बड़े मैदान से ज्यादा एक छोटी-सी दुनिया था
हमारे घर के पास ही गांव का School था। मैं उस समय किसी Class में पढ़ने के लिए दाखिल नहीं हुआ था, लेकिन बड़े भाई और दूसरे Siblings के साथ कभी-कभी School चला जाता था।
शाम के समय वहीं Cricket खेलने का मौका मिल जाता।
School का Ground बहुत बड़ा नहीं था। बल्कि पहाड़ों में Ground की अपनी एक अलग कहानी होती है।
मैदान की एक तरफ जगह खत्म होती थी और उसके आगे ढलान शुरू हो जाती थी।
इसका मतलब था कि अगर कोई चौका या Six मार दे तो Ball हमेशा Boundary के पास रुक जाए, ऐसा जरूरी नहीं था। कई बार Ball ढलान से नीचे चली जाती और फिर उसे वापस लाने के लिए किसी को भागना पड़ता।
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| हमारे यहाँ Boundary हमेशा मैदान की सीधी रेखा नहीं होती थी—कभी Ball ढलान से नीचे चली जाती थी और Ground की बनावट ही खेल का हिस्सा बन जाती थी। |
आज के Cricket में हम Boundary, Field Placement और Scoring Areas की बात करते हैं।
लेकिन उस समय हमारे लिए Scoring Area किसी Coaching Book में नहीं था।
जिस दिशा में Ball मारने के बाद उसे ढलान में ढूंढने के लिए ज्यादा दूर जाना पड़े, वह जगह शायद बहुत अच्छी Boundary तो थी, लेकिन बहुत अच्छी Fielding Location नहीं।
हम इन बातों को Cricket की भाषा में नहीं समझते थे।
हम बस खेलते-खेलते समझ रहे थे कि हर Ground की अपनी कहानी होती है।
सुविधा कम थी, लेकिन Cricket कम नहीं था
उस समय हमारे पास Professional Cricket Equipment नहीं था।
लकड़ी की Wickets होती थीं और Bat भी हमेशा बाजार वाला नहीं होता था। कभी-कभी घर में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की चीजें ही हमारे लिए Bat का काम कर देती थीं।
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| सामान कम था, लेकिन Cricket खेलने की खुशी में कोई कमी नहीं थी। लकड़ी का बल्ला भी उस समय हमें किसी बड़े Cricket bat से कम नहीं लगता था। |
आज जब मैं उस समय को याद करता हूँ तो एक छोटी-सी बात समझ आती है।
सामान कम होने का मतलब खेल छोटा होना नहीं है।
हमारे पास अच्छी Pitch नहीं थी।
Professional Bat नहीं था।
Leather Ball नहीं थी।
लेकिन खेलने की इच्छा पूरी थी।
अगर Wicket ठीक नहीं है तो कोई दूसरी लकड़ी लगा दो।
अगर Bat सही नहीं है तो जो उपलब्ध है उससे खेल लो।
अगर Ground छोटा है तो उसी के हिसाब से Rules बना लो।
अगर Ball ढलान में चली गई तो उसे ढूंढकर वापस आ जाओ।
यानी हम Cricket को सुविधाओं के हिसाब से नहीं खेलते थे।
हम उपलब्ध सुविधाओं के हिसाब से Cricket बना लेते थे।
आज के नजरिए से देखें तो यह Local Cricket की एक छोटी-सी लेकिन महत्वपूर्ण खूबी थी।
शायद बचपन में ही मुझे Cricket का पहला Spiritual lesson मिल गया था
उस समय मुझे “Present Moment” या “Mindfulness” जैसे शब्दों का कोई मतलब नहीं पता था।
लेकिन जब मैं बड़े भाई के साथ Cricket खेलता था, तब मेरा ध्यान सिर्फ उसी खेल में होता था।
Ball कब आएगी?
Bat कहाँ लगाना है?
अगली Ball कौन डालेगा?
किस तरफ मारना है?
बस यही दुनिया थी।
न कोई Scorecard की चिंता।
न कोई Career की चिंता।
न यह सवाल कि लोग मेरे खेल के बारे में क्या सोचेंगे।
आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि बचपन में हम कई ऐसी चीजें बिना नाम जाने जी रहे होते हैं, जिन्हें बड़े होने के बाद समझने की कोशिश करते हैं।
शायद यही वजह है कि मेरे लिए Spirituality हमेशा सिर्फ पूजा, मंदिर या ध्यान तक सीमित नहीं रही।
कभी-कभी पूरी तरह किसी काम में डूब जाना भी अपने आप में एक अनुभव होता है।
और मेरे लिए उस अनुभव की शुरुआत शायद किसी Meditation Hall में नहीं, बल्कि एक छोटे पहाड़ी Ground में हुई थी।
फिर पहाड़ से Rampur Bushahr और एक बड़ा Ground
इसके बाद Primary Schooling के लिए मैं Rampur Bushahr आ गया।
पहली Class में जब मैं नए School में गया तो वहाँ का Ground गांव के Ground की तुलना में काफी बड़ा लगा।
Rampur Bushahr में नया-नया आया था और School का Ground घर के भी काफी पास था।
इसलिए Ground मुझे जल्दी ही पसंद आने लगा।
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| गांव के छोटे Ground के बाद Rampur Bushahr में मिला यह बड़ा Ground मेरे Cricket के बचपन का अगला पड़ाव था। |
लेकिन एक चीज बिल्कुल नहीं बदली।
गांव में जिस तरह शाम के समय Cricket खेलने जाने का इंतजार रहता था, Rampur Bushahr में भी वही routine शुरू हो गया।
बस फर्क इतना था कि अब Ground बड़ा था और खेलने के लिए जगह ज्यादा थी।
Cricket का कीड़ा गांव में लग चुका था; Rampur Bushahr ने उसे बस थोड़ा बड़ा मैदान दे दिया।
Cricket के साथ दूसरे Sports भी मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गए
Rampur Bushahr आने के बाद मेरा जुड़ाव सिर्फ Cricket तक सीमित नहीं रहा।
मैं Basketball, Badminton, Carrom और दूसरे Sports भी खेलने लगा।
उस समय पढ़ाई भी ठीक चल रही थी।
पहली Class में First, दूसरी Class में Second और तीसरी Class में Third Position आई।
मैं यह दावा नहीं कर सकता कि पढ़ाई में अच्छा होने का सीधा कारण Sports था।
लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर एक बात जरूर लगती है—दिन का पूरा समय सिर्फ किताबों में नहीं बीतता था। शरीर भी Active रहता था, दोस्तों के साथ समय भी मिलता था और दिमाग को अलग-अलग तरह की चीजों में लगने का मौका मिलता था।
आज Sports और Education के बीच Balance की बातें बहुत होती हैं।
मेरे बचपन में यह Balance किसी योजना का हिस्सा नहीं था।
वह बस जिंदगी का हिस्सा था।
फिर एक दिन Cricket की वजह से Ground जाना बंद हो गया
मुझे तीसरी Class का वह समय आज भी याद है।
School घर से लगभग पाँच मिनट की दूरी पर था।
पहले मैं शाम को खेलने जाता था, लेकिन धीरे-धीरे मेरी आदत बदल गई।
School से छुट्टी हुई।
घर आया।
कपड़े बदले।
और सीधा Ground।
कई बार खाना खाया या नहीं खाया, इसका भी ध्यान नहीं रहता था।
मम्मी-पापा अपनी Shop चलाते थे। सुबह Shop चले जाते और शाम को घर लौटते।
मेरे बड़े भाई ने एक दिन पापा से शिकायत कर दी कि मैं कभी-कभी Homework नहीं करता और बिना कुछ खाए School से सीधे Ground चला जाता हूँ।
फिर एक दिन पापा Lunch करने घर आए और मुझे बहुत बुरी तरह मारा।
उस समय मैं बहुत डर गया था।
उस डर की वजह से करीब 2–3 महीने तक Ground जाना बंद हो गया।
एक बच्चे के लिए यह छोटा बदलाव नहीं था।
जिस Ground की तरफ School से छुट्टी होते ही जाने की जल्दी रहती थी, उसी Ground से अब दूरी बन गई थी।
लेकिन शायद Cricket से मेरा रिश्ता इतना कमजोर नहीं था कि कुछ महीनों की दूरी से खत्म हो जाता।
समय बीता।
घर का माहौल सामान्य हुआ।
और मैंने फिर Cricket और बाकी Sports खेलना शुरू कर दिया।
आज उस घटना को याद करता हूँ तो सिर्फ मार खाने की बात याद नहीं आती।
एक दूसरी चीज भी समझ आती है—
किसी चीज के प्रति जुनून और अपनी बाकी जिम्मेदारियों के बीच Balance रखना भी जरूरी है।
तब मैं बच्चा था, इसलिए यह समझ नहीं थी।
आज है।
फिर Cricket Ground से निकलकर Television तक पहुँच गया
उस दौर में भारतीय Cricket को देखना भी अपने आप में एक अनुभव था।
मुझे Virender Sehwag बहुत पसंद थे।
50-over Cricket में भी उनका खेलने का अंदाज इतना तेज था कि आज के कई T20 Batters की याद आ जाए।
वह कई बार जल्दी Out हो जाते थे, लेकिन उनकी Batting देखने में जो मजा था, वह अलग ही था।
बड़े भाइयों के साथ बैठकर India के Match देखना और छोटी-छोटी Bet लगाना भी हमारी अपनी Cricket tradition थी।
“अब Sehwag चौका मारेगा।”
“नहीं, Six मारेगा।”
और जब वह सच में Boundary लगा देते तो Prediction सही होने की खुशी अलग होती थी।
उस दौर में Sachin Tendulkar, Sourav Ganguly, VVS Laxman और Rahul Dravid जैसे खिलाड़ी भारतीय Cricket की पहचान थे।
फिर Yuvraj Singh, Mohammad Kaif, Zaheer Khan, Harbhajan Singh, Anil Kumble, Ashish Nehra और Ajit Agarkar जैसे खिलाड़ी भी उस Cricketing era का हिस्सा थे।
मुझे बतौर Captain Sourav Ganguly बहुत पसंद थे।
आज भी मेरी नजर में वह भारतीय Cricket के सबसे प्रभावशाली Captains में से एक हैं।
बचपन में शायद मुझे उनकी Captaincy की Technical समझ नहीं थी।
लेकिन उनका attitude दिखाई देता था।
और शायद यही Cricket की एक खूबसूरत बात है।
बचपन में हम पहले खिलाड़ी को महसूस करते हैं, बाद में उसके खेल को समझना शुरू करते हैं।
पहाड़ों में Tennis Ball Cricket की अपनी एक दुनिया थी
उस समय हमारे इलाके में Leather Ball से ज्यादा Tennis Ball और Plastic Ball से Cricket खेलना आम था।
कई बार अलग तरह की स्थानीय Balls से भी खेला जाता था।
यह Cricket किसी Academy के fixed नियमों के हिसाब से नहीं चलता था।
Ground जैसा मिला, उसी के हिसाब से खेलो।
Ball जैसी मिली, उसी से खेलो।
खिलाड़ी जितने मिले, उसी हिसाब से Team बनाओ।
और अगर कोई खिलाड़ी कम पड़ गया तो कभी-कभी Rules भी बदल जाते थे।
यही Local Cricket था।
आज Professional Cricket में हर चीज structured है—Pitch तैयार है, Boundary तय है, Equipment तय है, Playing XI तय है।
लेकिन Local Cricket में खेल पहले आता था, व्यवस्था बाद में।
शायद इसी वजह से Local Cricket की यादों में Scorecard से ज्यादा कहानियाँ बचती हैं।
छोटे Ground ने मुझे Cricket की एक अलग भाषा सिखाई
समय के साथ मैंने महसूस किया कि छोटे Ground में खेलने का फायदा सिर्फ यह नहीं था कि हम Cricket खेलते थे।
हम Ground को पढ़ना भी सीख रहे थे।
किधर जगह ज्यादा है?
किधर Shot खेलने पर Ball जल्दी Boundary तक जाएगी?
कहाँ Ball ढलान में जा सकती है?
कौन Fielder अच्छी तरह Catch करता है?
किस Bowler की Ball पर कौन-सा Shot सुरक्षित है?
उस समय हमें इन चीजों के लिए कोई fancy शब्द नहीं पता था।
लेकिन यही तो Cricket है।
आज इसे Game Awareness कहते हैं।
लेकिन इसकी जड़ें बहुत साधारण हैं—
अपने आसपास की परिस्थिति को देखना।
शायद इसी वजह से आज जब मैं किसी Batter को Shot खेलते हुए देखता हूँ, तो सिर्फ यह नहीं देखता कि Shot Four गया या Out हो गया।
मैं यह भी देखता हूँ कि उसने Ground की परिस्थिति को कितना पढ़ा था।
उसके पास कौन-से options थे।
और उसने उसी Ball पर वही Shot क्यों चुना।
पहाड़ों ने मुझे Cricket में एक और चीज सिखाई—हर परिस्थिति आपके हिसाब से नहीं होगी
पहाड़ में रहते हुए प्रकृति को बहुत करीब से देखने का मौका मिलता है।
मौसम अचानक बदल सकता है।
बारिश आ सकती है।
रास्ता कठिन हो सकता है।
किसी जगह चढ़ाई ज्यादा हो सकती है।
आप हर चीज को अपनी इच्छा के अनुसार नहीं बदल सकते।
Cricket भी कुछ ऐसा ही है।
आप Practice कर सकते हैं।
Fitness पर काम कर सकते हैं।
Shot Selection सुधार सकते हैं।
Bowling पर मेहनत कर सकते हैं।
लेकिन अगली Ball exactly कैसी होगी, Edge कहाँ जाएगा या Catch हाथ में आएगा या नहीं—हर चीज आपके Control में नहीं होती।
और यहीं मेरे लिए Cricket और Spirituality का connection थोड़ा गहरा होता है।
Spirituality का मतलब मेरे लिए मैदान छोड़ देना नहीं है।
बल्कि पूरी तरह मैदान में रहकर यह समझना है कि हर परिस्थिति को अपने हिसाब से चलाना संभव नहीं है।
आप अपना काम कर सकते हैं।
अपनी तैयारी कर सकते हैं।
अपना Best दे सकते हैं।
फिर जो परिस्थिति सामने आए, उसके साथ खेलना पड़ता है।
शायद पहाड़ों ने यह बात मुझे Cricket से पहले ही थोड़ा-बहुत सिखा दी थी।
शायद प्रकृति के बीच खेलना भी एक तरह की सीख थी
आज जब मैं अपने बचपन के उन Grounds के बारे में सोचता हूँ तो एक बात खास लगती है।
तब Ground सिर्फ खेलने की जगह था।
लेकिन उसके आसपास की चीजें भी हमारे खेल का हिस्सा थीं।
पहाड़ थे।
ढलान थी।
हवा थी।
कभी धूप थी।
कभी मौसम बदल जाता था।
और हमें उसी परिस्थिति में खेलना होता था।
हमने कभी यह नहीं कहा कि पहले मौसम perfect हो जाए, फिर Cricket खेलेंगे।
जो था, उसी में खेलना था।
यही बात जिंदगी में भी कितनी बार सामने आती है।
हम अक्सर चाहते हैं कि परिस्थितियाँ पहले हमारे हिसाब से हो जाएँ और फिर हम अपना काम शुरू करें।
लेकिन शायद जिंदगी और Cricket दोनों का खेल थोड़ा अलग है।
Perfect परिस्थिति का इंतजार करते रहने से ज्यादा जरूरी है, उपलब्ध परिस्थिति को समझकर अपना खेल खेलना।
आज Cricket को देखते हुए मुझे सिर्फ Score नहीं दिखाई देता
मेरी Cricket Journey में समय के साथ बहुत कुछ बदला।
पहले मैं सिर्फ खेलना चाहता था।
फिर मैं Cricket देखने लगा।
फिर खिलाड़ियों को पसंद करने लगा।
फिर धीरे-धीरे यह समझने लगा कि कोई खिलाड़ी अच्छा या खराब सिर्फ Runs और Wickets से तय नहीं होता।
एक Batter 20 Run बनाकर भी बहुत अच्छी innings खेल सकता है।
और कोई 70 Run बनाकर भी अपनी Team को मुश्किल में डाल सकता है।
कई बार फर्क सिर्फ Runs का नहीं, सही Shot Selection का भी होता है।
एक Bowler Wicket लिए बिना भी Match में अपना काम कर सकता है।
एक Fielder का एक छोटा-सा Stop कभी-कभी Scorecard पर दिखाई नहीं देता, लेकिन Match का momentum बदल सकता है।
यानी Cricket को जितना देखते जाते हैं, उतना समझ आता है कि Scoreboard पूरी कहानी नहीं बताता।
शायद यही बात जिंदगी पर भी लागू होती है।
जो दिखाई दे रहा है, उसके पीछे भी बहुत कुछ चल रहा होता है।
शायद इसी वजह से मैं Cricket को Spirituality से जोड़ पाता हूँ
मेरे लिए Cricket और Spirituality दो बिल्कुल अलग दुनिया नहीं हैं।
Cricket ने मुझे मैदान में रहना सिखाया।
और अध्यात्म ने धीरे-धीरे उसी अनुभव को थोड़ा गहराई से देखने का नजरिया दिया।
पहले मैं सोचता था—
मैंने कितने Runs बनाए?
अब कभी-कभी सोचता हूँ—
मैंने उस Situation में क्या सीखा?
पहले हार सिर्फ हार लगती थी।
अब लगता है कि हार के पीछे भी कोई ऐसी चीज हो सकती है जिसे समझना बाकी है।
पहले Ground सिर्फ खेलने की जगह था।
अब लगता है कि वही Ground किसी खिलाड़ी को उसकी सीमाएँ, उसकी आदतें और उसकी प्रतिक्रियाएँ भी दिखा सकता है।
और शायद अध्यात्म का एक अर्थ मेरे लिए यही है—
जो हो रहा है, उसे थोड़ा गहराई से देखना।
हर चीज को तुरंत अच्छा या बुरा नाम देने से पहले उसे समझने की कोशिश करना।
आज भी किसी छोटे पहाड़ी Ground में Cricket देखकर कुछ अपना-सा लगता है
आज अगर मैं किसी छोटे पहाड़ी Ground में बच्चों को Cricket खेलते देखता हूँ, तो मुझे सिर्फ बच्चे खेलते हुए नहीं दिखाई देते।
कहीं न कहीं मुझे अपना बचपन भी दिखाई देता है।
वही उत्साह।
वही इंतजार।
वही Ball के पीछे भागना।
वही उम्मीद कि अगली बार Bat हाथ में आएगा तो कुछ बड़ा करेंगे।
फर्क सिर्फ इतना है कि तब मैं Cricket खेलता था, आज Cricket को थोड़ा समझने की कोशिश करता हूँ।
तब मुझे सिर्फ चौका और Six दिखाई देता था।
आज उस Shot से पहले का Decision भी दिखाई देता है।
तब जीतने पर खुशी होती थी।
आज कभी-कभी हार में छिपी सीख भी दिखाई देती है।
और शायद यही समय के साथ Cricket का बदलना नहीं है।
Cricket वही है। बदलने वाली चीज उसे देखने वाली हमारी नजर है।
एक छोटा पहाड़ी Ground, लेकिन उससे मिली बड़ी दुनिया
मेरे लिए Cricket की शुरुआत किसी बड़ी कहानी की तरह नहीं हुई थी।
एक छोटा बच्चा था।
बड़ा भाई था।
लकड़ी का बरामदा था।
गांव का छोटा School Ground था।
ढलान थी।
साधारण Bat था।
और खेलने की बहुत इच्छा थी।
फिर Ground बदले।
School बदले।
शहर बदला।
Cricket देखने का तरीका बदला।
Cricket को समझने का नजरिया बदला।
लेकिन एक चीज नहीं बदली—
Cricket के लिए वह खिंचाव।
आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि शायद उस छोटे पहाड़ी Ground ने मुझे सिर्फ Cricket खेलना नहीं सिखाया।
उसने मुझे यह भी सिखाया कि खेल की खूबसूरती उसकी सुविधाओं से नहीं, बल्कि उसमें पूरी तरह उतर जाने से पैदा होती है।
और शायद Spirituality से Cricket को जोड़ने की मेरी शुरुआत भी यहीं कहीं हुई थी—बिना यह जाने कि इसे अध्यात्म कहते हैं।
क्योंकि जब कोई बच्चा बिना Score की चिंता किए सिर्फ खेलना चाहता है, तो वह किसी बड़ी Philosophy के बारे में नहीं सोच रहा होता।
वह बस खेल में होता है।
शायद बाद में हम उसी अनुभव को अलग-अलग नाम देते हैं।
मेरे लिए वह अनुभव किसी बड़े Stadium में नहीं हुआ था।
वह एक छोटे से पहाड़ी Ground में हुआ था।
और शायद इसी वजह से आज भी जब मैं Cricket देखता हूँ, तो मुझे सिर्फ Runs, Wickets और Scoreboard नहीं दिखाई देते।
मुझे उसके पीछे की कहानी भी दिखाई देती है।
एक छोटा Ground था, एक साधारण Bat था और Cricket का एक छोटा-सा जुनून था—लेकिन शायद उसी छोटे Ground ने मेरी Cricket को देखने की नजर हमेशा के लिए बड़ी कर दी।




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