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Showing posts from November, 2025

''विराट कोहली का ध्यान का सफर: मेंटल स्ट्रेंथ का राज़ ''

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 मैच का आखिरी ओवर ,टीम को जीत के  लिए 10 रन  चाहिए,  और विराट कोहली क्रीज़ पर..... लेकिन आज हम बात नहीं करेंगे उनके शॉट्स की , बात करेंगे उनके माइंड  की!  2014 के बाद विराट में जो बदलाव आया ,वो सिर्फ फिटनेस का नहीं बल्कि मेन्टल स्ट्रेंथ का नतीजा था | और इसकी चाबी थी  - ध्यान और मेडिटेशन |  2014 :  वो साल जब सब कुछ बदल गया : 2014 इंग्लैंड टूर विराट के करियर  का टर्निंग पॉइंट था | ख़राब फॉर्म  के बाद विराट ने महसूस किया  कि फिजिकल ट्रेनिंग काफी नहीं है | इसी दौरान उन्होंने मैडिटेशन को गम्भीरता से लेना शुरू किया | विराट ने मीडिया के सामने ये माना की मेन्टल  हेल्थ फिजिकल  फिटनेस जितनी ही जरूरी है |  2014 इंग्लैंड टूर :   वो मोड़ जब विराट ने पाया मेन्टल  राज़    सच्चाई ये है कि 2014 इंग्लैंड टूर विराट के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था | ख़राब प्रदर्शन के दौरान उन्हें एहसास  हुआ कि सिर्फ शारीरिक प्रशिक्षण प्रयाप्त नहीं है | इसी अवधि में उन्होंने गंभीरता से मैडिटेशन अभ्यास शुरू किया |  ...

क्रिकेट और आध्यात्म: पहाड़ों से शुरू हुई मेरी कहानी

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नमस्ते दोस्तों ! मेरा नाम अर्जुन सिंह है | मैं  हिमाचल प्रदेश का रहने वाला हूं | बचपन से ही दो चीज़ें मेरी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा रही   है - क्रिकेट और प्रार्थना | सुबह उठते ही मैं स्कूल जाने से पहले घर  के मंदिर में पूजा करके स्कूल जाना और  शाम को  स्कूल   से आते ही होमवर्क ख़तम  करके  स्कूल ग्राउंड   में छक्के चौके  मारना  |  ये दोनों ही मेरी ज़िन्दगी क रंग हुआ करते थे | बचपन में क्रिकेट और प्रार्थना दोनों क्यों खास थे? इस समय मुझे नहीं पता था कि ये दोनों चीजें आगे चलकर मेरी सोच का हिस्सा बन जाएंगी। मेरे लिए क्रिकेट सिर्फ मैदान पर खेला जाने वाला खेल था और प्रार्थना रोज की एक आदत। लेकिन धीरे-धीरे मुझे महसूस हुआ कि दोनों ही मुझे किसी न किसी तरह अपने मन को समझने और संभालने की सीख दे रहे थे। क्रिकेट खेलते समय मेरा पूरा ध्यान खेल पर होता था। वहीं प्रार्थना के समय कुछ देर शांत बैठना मुझे अलग तरह का सुकून देता था। शायद बचपन में मैं इन दोनों के बीच का connection समझ नहीं पाता था, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो दोनों मे...