क्रिकेट और आध्यात्म: पहाड़ों से शुरू हुई मेरी कहानी
''नमस्ते दोस्तों ! मेरा नाम अर्जुन सिंह है | मैं हिमाचल प्रदेश का रहने वाला हूं | बचपन से ही दो चीज़ें मेरी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा रही है - क्रिकेट और प्रार्थना | सुबह उठते ही मैं स्कूल जाने से पहले घर के मंदिर में पूजा करके स्कूल जाना और शाम को स्कूल से आते ही होमवर्क ख़तम करके स्कूल ग्राउंड में छक्के चौके मारना | ये दोनों ही मेरी ज़िन्दगी क रंग हुआ करते थे |''
''विराट कोहली का ध्यान का सफर: मेंटल स्ट्रेंथ का राज़ ''
'' आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तोह समझता हूं कि क्रिकेट और आध्यात्म दोनों ही एक जैसे हैं | जैसे क्रिकेट में हम ' वन डे एट ए टाइम ' खेलते हैं, वैसे ही ज़िन्दगी में भी हमें ' वन डे एट ए टाइम ' जीना चाहिए | जैसे ध्यान में हम अपने विचारों को कण्ट्रोल करते है, वैसे ही क्रिकेट में हम को दबाव वाली स्तिथि में खुद को संभालते हैं |
क्रिकेट +आध्यात्म
'' इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपके साथ अपने इन्ही अनुभवों को साझा करना चाहता हूं | हम साथ - साथ समझेंगे कि कैसे क्रिकेट के सबक हमारे डेली लाइफ में काम आ सकते हैं ,और कैसे आध्यात्मिकता हमें बेहतर खिलाड़ी बना सकती है |
यह ब्लॉग क्यों बनाया?
इस ब्लॉग का उद्देश्य सिर्फ क्रिकेट की बात करना नहीं है, बल्कि क्रिकेट के माध्यम से जीवन को समझना है।
आगे इस ब्लॉग में आपको क्या मिलेगा?
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मैच से पहले मानसिक तैयारी कैसे करें
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दबाव में प्रदर्शन कैसे बेहतर करें
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क्रिकेट से जीवन के सबक
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ध्यान और खेल का संबंध
''क्रिकेट हमें सिर्फ रन बनाना नहीं सिखाता, बल्कि गिरकर दोबारा उठना भी सिखाता है''।


Nice starting bro . Best of luck for future
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