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Showing posts with the label मानसिक मजबूती

“नेट्स में अच्छा खेलता हूँ, लेकिन मैच में फेल क्यों हो जाता हूँ?”

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                                                  नेट्स में confidence high होता है, लेकिन असली परीक्षा मैच में होती है | प्रस्तावना दोस्तों, आप सभी क्रिकेट प्रेमियों को मेरा नमस्कार!  क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप नेट्स में अच्छा खेलते हैं लेकिन मैच में फेल हो जाते हैं ? मेरे  साथ तो ये कई बार हुआ है, और सच कहूँ तो उस time समझ ही नहीं आता था कि गलती कहाँ हो रही है। shots perfectly टाइम होते हैं… लेकिन जैसे ही मैच शुरू होता है, सब कुछ उल्टा होने लगता है? अगर हाँ, तो यकीन मानिए — आप अकेले नहीं हैं। मैंने खुद भी ये phase कई बार feel किया है। असली समस्या क्या है? पहली नजर में लगता है कि शायद technique में कमी है, लेकिन सच कुछ और होता है। नेट्स और मैच में सबसे बड़ा फर्क होता है — pressure का नेट्स में डर नहीं होता मैच में हर गेंद important लगती है यही चीज़ आपका game बदल देती है। और यही चीज़ मैंने धीरे-धीरे अपने गेम में notice की थी।   ...

“IPL का असली राज: ये 2 सेकंड की आदत आपको बना सकती है Consistent खिलाड़ी”

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प्रस्तावना दोस्तों आप सभी क्रिकेट प्रेमियों को मेरा नमस्कार ! अगर आप भी मेरी तरह क्रिकेट खेलते हैं, तो आपने भी कभी ना कभी बिना वजह जल्दी आउट होने की frustration जरूर महसूस की होगी। जैसा की आप सब को मालुम है IPL का हर मैच अपने आप में एक कहानी होता है। कभी कोई खिलाड़ी हीरो बन जाता है, तो कभी वही खिलाड़ी अगले मैच में फ्लॉप हो जाता है। लेकिन अगर आपने ध्यान से देखा हो, तो IPL में कई बार ऐसा होता है कि एक छोटी सी गलती पूरा मैच बदल देती है। एक गलत शॉट, एक मिस कैच, या एक खराब निर्णय… और मैच हाथ से निकल जाता है। तब मन में एक सवाल आता है — क्या ये सिर्फ skill की कमी है? मेरा जवाब है — नहीं |  अगर आप क्रिकेट में फोकस और concentration बढ़ाना चाहते हैं, तो यह जरूर पढ़ें: ''क्रिकेटरों के लिए 5 मिनट का ध्यान : मैच से पहले टेंशन फ्री कैसे रहें'' असल में फर्क बहुत छोटी-छोटी चीज़ों में छिपा होता है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। छोटी आदत, बड़ा फर्क IPL में हर खिलाड़ी talented होता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए हर किसी ने कड़ी मेहनत की होती है। लेकिन फिर भी कुछ खिलाड़ी बार-बार अच्...

''विराट कोहली का ध्यान का सफर: मेंटल स्ट्रेंथ का राज़ ''

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 मैच का आखिरी ओवर ,टीम को जीत के  लिए 10 रन  चाहिए,  और विराट कोहली क्रीज़ पर..... लेकिन आज हम बात नहीं करेंगे उनके शॉट्स की , बात करेंगे उनके माइंड  की!  2014 के बाद विराट में जो बदलाव आया ,वो सिर्फ फिटनेस का नहीं बल्कि मेन्टल स्ट्रेंथ का नतीजा था | और इसकी चाबी थी  - ध्यान और मेडिटेशन |  2014 :  वो साल जब सब कुछ बदल गया : 2014 इंग्लैंड टूर विराट के करियर  का टर्निंग पॉइंट था | ख़राब फॉर्म  के बाद विराट ने महसूस किया  कि फिजिकल ट्रेनिंग काफी नहीं है | इसी दौरान उन्होंने मैडिटेशन को गम्भीरता से लेना शुरू किया | विराट ने मीडिया के सामने ये माना की मेन्टल  हेल्थ फिजिकल  फिटनेस जितनी ही जरूरी है |  2014 इंग्लैंड टूर :   वो मोड़ जब विराट ने पाया मेन्टल  राज़    सच्चाई ये है कि 2014 इंग्लैंड टूर विराट के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था | ख़राब प्रदर्शन के दौरान उन्हें एहसास  हुआ कि सिर्फ शारीरिक प्रशिक्षण प्रयाप्त नहीं है | इसी अवधि में उन्होंने गंभीरता से मैडिटेशन अभ्यास शुरू किया |  ...