''क्रिकेट की भावना कैसे बनाये रखें ? धोनी के 5 आधयात्मिक नियम ''
क्या आपने कभी सोचा है कि एमएस धोनी दबाव की स्तिथियों में इतने शांत कैसे रहते हैं ?
2019 विश्व कप सेमी-फाइनल का वह क्षण याद है? जब अंपायर ने आउट दिया , और धोनी बिना एक शब्द कहे पवेलियन लौट गए | कोई बहस नहीं , कोई नाटक नहीं | यह कोई कमजोरी नहीं ,बल्कि आध्यात्मिक शक्ति का प्रदर्शन था |
आज मैं आपको बताऊंगा धोनी के 5 आध्यात्मिक नियम जो हर क्रिकेटर को 'क्रिकेट की भावना ' बनाये रखने में सहायता कर सकते हैं |
आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी चुनौती : जीत बनाम भावना
आजकल क्रिकेट देखते समय मुझे अक्सर लगता है:
- खिलाड़ी आक्रामक व्यवहार दिखा रहे हैं
- अम्पायरों के निर्णयों पर अनावश्यक बहस
- प्रतिद्वंदियों के प्रति सम्मान काम हो रहा है
- 'किसी भी कीमत पर जीत' की मानसिकता बढ़ रही है
ऐसे में 'क्रिकेट की भावना' को बनाये रखना वास्तविक चुनौती बन है |
धोनी के 5 आध्यात्मिक नियम जो क्रिकेट की भावना बनाये रखते हैं
नियम 1 : प्रक्रिया पर ध्यान दें , परिणाम पर नहीं
धोनी कहते हैं : ''मैं परिणाम के बारे में नहीं सोचता , प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करता हूं |
कैसे लागू करें :
- मैच से पहले तैयारी पर ध्यान दें
- प्रदर्शन के लक्ष्य निर्धारित करें , ना कि जीतने के लक्ष्य पर
- हर गेंद को अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करें
नियम 2 : वैराग्य - जीत - हार से भावनात्मक न हों
धोनी के चेहरे पर जीत में भी हार में भी एक जैसी अभिव्यक्ति रहती है |
कैसे लागू करें :
- प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास करें
- मैच के बाद विश्लेषण करें, पछतावा नहीं
- गलतियों से सीखें और आगे बढ़ें
नियम 3 : सभी का सम्मान करें - प्रतिद्वंदियों से लेकर अम्पायरों तक
धोनी ने कभी किसी अंपायर के निर्णय पर बहस नहीं की |
कैसे लागू करें:
- अंपायर के निर्णय को स्वीकार करें
- प्रतिद्वंदियों के अच्छे प्रदर्शन की सराहना करें
- युवा खिलाडियों का समर्थन करें
नियम 4 : उदाहरण से नेतृत्व करें , शब्दों से नहीं
धोनी कभी उपदेश नहीं देते , कर्म से सिखाते हैं |
कैसे लागू करें :
- टीम में वरिष्ट हों तो अच्छा व्यवहार दिखाएं
- अभ्यास सत्रों में अनुशासन बनाये रखें
- मैदान के बाहर का व्यवहार भी पेशेवर रखें
नियम 5 : सफलता में विनम्र बने रहें
आईसीसी ट्रॉफियां जीतने के बाद भी धोनी मैदान के कर्मचारियों के साथ बैठ कर भोजन करते हैं |
कैसे लागू करें :
- सफलता का उत्सव मनाएं लेकिन अहंकार न बढ़ने दें
- सहायक कर्मचारियों को श्रेय दें
- प्रशंसकों के प्रति कृतिज्ञ रहें
हिमाचल के ग्रामीण क्रिकेट में मैंने क्रिकेट की भावना को ऐसे देखा
मैंने हिमाचल के एक ग्रामीण मैच में देखा:
- बल्लेबाज़ी टीम के खिलाड़ी ने खुद का आउट घोशित कर दिया
- अंपायर की जगह कोई नहीं था ,खिलाड़ियों ने खुद अंपायरिंग की
- मैच के बाद जीतने वाली और हारने वाली टीम ने एक साथ भोजन किया
यह है असली 'क्रिकेट की भावना' - जहां जीतने से अधिक महत्वपूर्ण है निष्पक्ष खेल और पारस्परिक सम्मान |
आज से ही शुरू करें? 7- दिवसीय चुनौती
- दिन 1 : सुबह 5 मिनट का ध्यान
- दिन 2 : अंपायर के एक निर्णय को बिना बहस के स्वीकार करें
- दिन 3 : प्रतिद्वंदी के एक अच्छे प्रदर्शन की प्रशंसा करें
- डीन 4 : अभ्यास में युवा खिलाड़ी को एक सुझाव दें
- दिन 5 : मैच से पहले केवल प्रक्रिया के लक्ष्य निर्धारित करें
- दिन 6 : जीत या हार, एक जैसा व्यवहार बनाये रखें
- दिन 7 : सहायक कर्मचारियों को धन्यवाद बोलें
अब आपकी बारी - चुनौती स्वीकार करें !
टिप्पणी में अवश्य बताएं:
- इन 5 नियमों में से आपको सबसे अधिक उपयोगी कौन सा नियम लगा?
- क्या आप 7- दिवसीय चुनौती स्वीकार करते हैं ?
- आपके अनुसार 'क्रिकेट की भावना' को बनाये रखने का सर्वोत्तम तरीका क्या है ?
आपकी टिप्पणियों से अन्य पाठकों को प्रेरणा मिलेगी !
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