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क्रिकेट में साक्षी भाव — जब खिलाड़ी अपने खेल के साथ अपने मन को भी देखने लगता है |

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 प्रस्तावना — खिलाड़ी सिर्फ खेल नहीं रहा, खुद को भी देख रहा है कभी-कभी क्रिकेट में एक गेंद के बाद अगली गेंद तक का छोटा-सा समय बहुत कुछ बता देता है। मान लीजिए Batter पिछली गेंद पर पूरी तरह beaten हुआ। गेंद निकल गई, वह कुछ पल crease पर खड़ा रहा और अब Bowler अगली गेंद के लिए वापस आ रहा है। बाहर से देखने पर सब सामान्य है, लेकिन Batter के दिमाग में पिछली गेंद अभी खत्म नहीं हुई होगी। वह सोच सकता है कि उसने ball को देर से पढ़ा, गलत shot चुना या अगली बार क्या करना है। लेकिन अगली गेंद तो फिर भी आने वाली है। यहीं मुझे क्रिकेट की एक छोटी-सी बात काफी interesting लगती है। अच्छे खिलाड़ी सिर्फ सामने आने वाली गेंद को नहीं देखते, वे कई बार अपनी reaction को भी पहचान लेते हैं। Replay में आपने भी देखा होगा—गलत shot के बाद किसी Batter का सिर नीचे हो जाता है, कोई बल्ले से हल्का-सा जमीन छूता है और फिर खुद को reset करता है, जबकि कोई खिलाड़ी बिना ज्यादा reaction दिए अगली गेंद के लिए उसी तरह तैयार हो जाता है। फर्क हमेशा technique का नहीं होता। कई बार फर्क इस बात का होता है कि खिलाड़ी अपने अंदर चल रही ...

क्रिकेट में इंतज़ार करना भी एक Skill है? Batter से लेकर Captain तक की कहानी

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                                                                               अच्छा बल्लेबाज़ हर गेंद पर जल्दबाज़ी नहीं करता, वह सही समय आने का इंतज़ार करता है। प्रस्तावना — कभी-कभी अगली गेंद खेलने से पहले उसका इंतज़ार करना पड़ता है Bowler अपने mark से आता है। Batter crease पर खड़ा है। पिछले कुछ Balls में Bowler लगातार लगभग एक ही area में गेंद डाल रहा है और Batter के पास attack करने का मौका भी है। लेकिन हर गेंद scoring ball नहीं होती। कभी-कभी जिस गेंद को Batter जल्दी खेलने की कोशिश करता है, वही उसका Wicket भी बन सकती है। यहीं से मुझे क्रिकेट की एक छोटी-सी बात काफी interesting लगती है। अच्छा Batter सिर्फ यह नहीं देखता कि अगली गेंद कहाँ आ रही है, बल्कि वह यह भी समझने की कोशिश करता है कि उसे उस गेंद के साथ कितना जल्दी या कितना देर से जाना है। आपने भी शायद देखा होगा कि कुछ Players Bowler क...

क्रिकेट में हार के बाद खिलाड़ी खुद को कैसे संभाले? Mental Strength का असली Test

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                                                                  हार के बाद खिलाड़ी के लिए सबसे जरूरी सवाल सिर्फ यह नहीं कि क्या हुआ, बल्कि यह भी है कि अब उसे क्या समझना है। प्रस्तावना — हार के बाद असली मुकाबला शुरू होता है क्रिकेट में हार-जीत तो लगी ही रहती है। जब दो टीमें मैदान पर उतरती हैं, तो एक के हिस्से में जीत आती है और दूसरी को हार का सामना करना पड़ता है। लेकिन क्रिकेट की एक बात मुझे हमेशा अलग लगती है— हार तब तक पूरी तरह तय नहीं होती, जब तक आखिरी गेंद नहीं हो जाती। मान लीजिए मैच खत्म हो चुका है। Dressing Room शांत है। टीम हार गई है और कोई खिलाड़ी अपनी Performance से खुश नहीं है। बाहर से वह बिल्कुल सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके दिमाग में शायद वही कुछ Moments बार-बार चल रहे हों— “अगर मैंने वो Decision नहीं लिया होता...” , “काश वो Catch पकड़ लिया होता...” या “अगर उस Over में सिर्फ एक Boundary कम जाती...” क्र...

"भगवद गीता के 7 सिद्धांत जो हर क्रिकेटर को जानने चाहिए | "

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                                                    भगवद गीता के कई सिद्धांत आज भी क्रिकेट के मानसिक पक्ष को समझने में प्रेरणा दे सकते हैं। प्रस्तावना  क्रिकेट को अक्सर सिर्फ Bat और Ball का खेल माना जाता है, लेकिन जो लोग इस खेल को करीब से देखते या खेलते हैं, वे जानते हैं कि असली मुकाबला कई बार दिमाग के अंदर चलता है। दबाव के समय लिया गया एक गलत फैसला पूरे मैच का रुख बदल सकता है। इसलिए क्रिकेट में Technique जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है शांत मन, धैर्य और सही सोच। भगवद गीता को आमतौर पर एक धार्मिक ग्रंथ के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसमें जीवन और मन को समझने वाले ऐसे सिद्धांत भी हैं, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। यही कारण है कि इसके कई संदेश खेलों, खासकर क्रिकेट, से भी जोड़े जा सकते हैं।     मेरी समझ में बड़े मैचों का सबसे बड़ा अंतर केवल कौशल नहीं, बल्कि निर्णय लेने की गुणवत्ता होती है । जब खिलाड़ी दबाव में होते हैं, तो वे वही...