"Cricket Awareness Series part 3 : Out होने के बाद अपनी innings का analysis कैसे करें? "
प्रस्तावना
Cricket Awareness Series के पहले भाग में हमने समझा था कि Batting से पहले किन बातों को समझना ज़रूरी है। दूसरे भाग में हमने जाना कि Batting के दौरान एक जागरूक बल्लेबाज़ किन चीज़ों को Observe करता है। लेकिन मेरे अनुभव में Awareness की असली परीक्षा तब शुरू होती है जब बल्लेबाज़ Out होकर Pavilion लौटता है।
कई बार आपने भी देखा होगा कि कोई बल्लेबाज़ Out होने के बाद तुरंत Pitch को दोष देने लगता है, कोई Bowler को बहुत ज़्यादा Credit दे देता है और कोई अपनी किस्मत को जिम्मेदार ठहराने लगता है। लेकिन सच कहूँ तो Cricket में Improvement अक्सर Runs बनाने से नहीं, बल्कि अपनी गलतियों को पहचानने से शुरू होती है।
मेरे हिसाब से हर Wicket के पीछे कोई न कोई कहानी छिपी होती है। कभी गलती Technique में होती है, कभी Shot Selection में, कभी Match Situation को न समझ पाने में और कई बार समस्या केवल इस बात की होती है कि बल्लेबाज़ उस समय पूरी तरह Present नहीं था।
एक दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश खिलाड़ी Out होने के बाद Scorecard तो देख लेते हैं, लेकिन अपनी Innings को दोबारा देखने की कोशिश नहीं करते। वे यह नहीं सोचते कि Out होने से पहले उनके मन में क्या चल रहा था, Bowler उन्हें क्या करवाना चाहता था या उन्होंने किस क्षण अपना Focus खोया था।
मैंने स्थानीय क्रिकेट में कई बार देखा है कि दो खिलाड़ी एक ही तरह से Out होते हैं। एक खिलाड़ी अगले Match में फिर वही गलती दोहराता है, जबकि दूसरा खिलाड़ी उसी Wicket से कुछ सीख लेता है। कुछ समय बाद दोनों खिलाड़ियों के खेल में बड़ा अंतर दिखाई देने लगता है। यही अंतर Awareness का होता है।
अगर Part 1 का संदेश था — "Batting से पहले समझो" और Part 2 का संदेश था — "Batting के दौरान Observe करते रहो", तो Part 3 का संदेश है — "Out होने के बाद ईमानदारी से सीखो।"
अगर आपने Cricket Awareness Series के पिछले दोनों भाग नहीं पढ़े हैं, तो उन्हें भी ज़रूर पढ़िए। पहले भाग में हमने Batting से पहले किन चीज़ों को Observe करना चाहिए, इस बारे में बात की थी। वहीं दूसरे भाग में Batting के दौरान किन बातों पर ध्यान देना चाहिए, इसे विस्तार से समझा था। यह लेख उसी श्रृंखला का अगला भाग है।
हर Wicket के पीछे कोई न कोई सीख छिपी होती है। सवाल सिर्फ इतना है कि हम उसे पहचान पाते हैं या नहीं।
" Cricket Awareness Series Part 1: Batting से पहले क्या समझना ज़रूरी है? "
"Cricket Awareness Series Part 2 : Batting के दौरान क्या observe करना जरूरी है? "
इसी Awareness को और गहराई से समझने के लिए Cricket Awareness Series के इस तीसरे भाग में हम जानेंगे कि Out होने के बाद अपनी Innings का Analysis कैसे करें, अपनी गलतियों को कैसे पहचानें और उन्हें अगले Match में बेहतर Decision Making में कैसे बदलें।
1. सबसे पहले Emotion नहीं, Reality देखो
क्रिकेट में Out होने के बाद अक्सर हमारा पहला Reaction भावनात्मक होता है। कभी गुस्सा आता है, कभी लगता है कि आज किस्मत साथ नहीं थी और कभी हम तुरंत किसी न किसी वजह को अपनी Wicket का कारण मान लेते हैं। लेकिन मेरे हिसाब से Innings का सही Analysis तब शुरू होता है जब हम Emotion से थोड़ा दूर होकर Reality को देखने की कोशिश करते हैं।
Out होने के बाद खुद से कुछ सवाल पूछना बहुत ज़रूरी है:
मैं कैसे Out हुआ?
क्या Ball वाकई इतनी अच्छी थी?
या मैंने गलत Shot Selection किया?
क्या मैंने Match Situation को नज़रअंदाज़ कर दिया?
Out होने से पहले मेरे मन में क्या चल रहा था?
कई बार बल्लेबाज़ Pavilion लौटते ही बोल देता है, "Ball बहुत अच्छी थी।" या फिर कहता है, "आज Luck ही खराब था।" लेकिन अगर हम शांति से अपनी Innings के बारे में सोचें, तो हर Wicket के पीछे Luck नहीं होता। कई बार हम जल्दबाज़ी कर देते हैं, कभी Field Placement को Ignore कर देते हैं और कभी Pressure में आकर ऐसा Shot खेल देते हैं जिसकी उस समय ज़रूरत ही नहीं थी।
मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि खिलाड़ी Out होने के बाद तुरंत Pitch को दोष देने लगते हैं। कोई Bowler की तारीफ़ करते-करते अपनी गलती भूल जाता है और कोई Umpire की बात करने लगता है। लेकिन बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो ईमानदारी से यह सोचते हैं कि मेरी अपनी गलती क्या थी।
एक दिलचस्प Observation यह भी है कि कई बार बल्लेबाज़ कहता है, "Shot गलत नहीं था।" और हो सकता है कि वह सही भी हो। लेकिन फिर सवाल यह उठता है कि क्या वह Shot उस Match Situation में सही था? क्या उस समय Risk लेना ज़रूरी था? या फिर समस्या Shot में नहीं, बल्कि Decision Making में थी?
मेरे हिसाब से Out होने के बाद सबसे पहला काम अपनी Innings को Judge करना नहीं, बल्कि उसे समझने की कोशिश करना होना चाहिए। क्योंकि जब तक हम Reality को वैसे नहीं देखेंगे जैसी वह थी, तब तक हम उससे कुछ सीख नहीं पाएँगे।
सीख
एक जागरूक बल्लेबाज़ Out होने के बाद तुरंत बहाने नहीं ढूँढता। वह सबसे पहले यह समझने की कोशिश करता है कि उसकी Wicket गिरी कैसे। क्योंकि क्रिकेट में Improvement अक्सर तब शुरू होती है जब हम अपनी गलतियों को पहचानना शुरू कर देते हैं।
2. Wicket Technique से गया या decision से?
Out होने के बाद ज़्यादातर बल्लेबाज़ सबसे पहले अपनी Technique पर सवाल उठाता है। अगर Cover Drive खेलते हुए Catch हो गया तो लगता है कि Cover Drive में कमी है। अगर Pull Shot पर Out हो गए तो लगता है कि Pull Shot सुधारने की ज़रूरत है। लेकिन मेरे हिसाब से हर Wicket के पीछे Technique ज़िम्मेदार नहीं होती।
कई बार Shot बिल्कुल सही होता है, लेकिन उस Shot को खेलने का समय गलत होता है।
मान लीजिए Cover Drive आपका Favourite Shot है। Net Practice में आप उस Shot से लगातार Boundary लगा रहे हैं। लेकिन Match में Team का Score 20/3 है, Ball Swing हो रही है और Slip में दो Fielder खड़े हैं। ऐसे समय पर वही Cover Drive जो Practice में Run दिला रहा था, Match में Wicket का कारण बन सकता है।
यहाँ समस्या Cover Drive में नहीं थी। समस्या उस समय उस Shot को खेलने के Decision में थी।
मुझे लगता है कि यही वह जगह है जहाँ बहुत से खिलाड़ी और बड़े खिलाड़ी अलग हो जाते हैं। ज़्यादातर खिलाड़ी यह सोचते हैं कि मेरा Favourite Shot है तो मैं खेलूँगा। लेकिन बड़े खिलाड़ी पहले Match Situation देखते हैं, फिर Shot खेलते हैं।
मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि बल्लेबाज़ एक बार Cover Drive से चौका मार देता है। इसके बाद वह अगली हर Ball पर वही Shot खेलने की कोशिश करता है। Bowler भी यही चाहता होता है। वह Line और Length में थोड़ा बदलाव करता है और आखिरकार वही Shot Wicket बन जाता है।
Out होने के बाद खिलाड़ी बोलता है,
"यार Timing नहीं हुई..."
लेकिन अगर ईमानदारी से देखा जाए तो कई बार Timing नहीं, Thinking गलत हुई होती है।
Rahul Dravid को ही देख लीजिए। उनके पास भी Cover Drive था, Pull Shot था और हर तरह के Stroke थे। लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत Technique से ज़्यादा Decision Making थी। वे हर अच्छी Ball को Boundary में बदलने की कोशिश नहीं करते थे। कई बार वे सिर्फ Ball को छोड़ देते थे, क्योंकि उन्हें पता होता था कि हर Ball खेलने के लिए नहीं होती।
Sachin Tendulkar का Sydney Test वाला उदाहरण भी इसी बात को समझाता है। उन्होंने लगभग पूरी Innings में Cover Drive खेलना ही छोड़ दिया था। क्या Sachin Cover Drive खेलना भूल गए थे? बिल्कुल नहीं। उन्होंने समझ लिया था कि उस Match में Off Side के कुछ Shot उनके लिए Risk बन रहे हैं। इसलिए उन्होंने अपने Favourite Shot से ज़्यादा Match Situation को महत्व दिया।
Virat Kohli की कई बड़ी Innings को अगर ध्यान से देखें तो पता चलता है कि वे केवल अच्छे Shot खेलने की वजह से सफल नहीं हुए। कई बार उन्होंने उन Ball को भी नहीं खेला जिन्हें वे आसानी से Boundary के लिए मार सकते थे। यही Awareness उन्हें अलग बनाती है।
एक छोटी सी Observation जो मैंने Local Cricket में नोटिस की है, वह यह है कि कई बल्लेबाज़ पहले से तय करके आते हैं कि आज Attack करना है। उसके बाद चाहे Pitch कुछ भी कहे, Bowler कुछ भी करे और Match Situation कुछ भी हो, वे अपना Plan नहीं बदलते। अक्सर ऐसे खिलाड़ी Pavilion में बैठकर अपनी Wicket का कारण Technique को बताते हैं, जबकि असली कारण गलत Decision होता है।
इसलिए Out होने के बाद खुद से एक सवाल ज़रूर पूछिए:
"क्या मैं गलत Shot खेलकर Out हुआ था, या सही Shot गलत समय पर खेलकर?"
कई बार इन दोनों सवालों के जवाब अलग होते हैं। और यही जवाब आपकी अगली Innings को बेहतर बना सकते हैं।
सीख
हर Wicket के बाद सिर्फ अपनी Technique को दोष मत दीजिए। कई बार समस्या Technique में नहीं, बल्कि Decision Making में होती है। क्रिकेट में बहुत बार सही Shot भी गलत समय पर खेला जाए, तो वह Wicket का कारण बन सकता है।
3. Out होने से पहले मेरे मन में क्या चल रहा था?
मेरे हिसाब से क्रिकेट में कई बार Wicket Ball की वजह से नहीं गिरती, बल्कि उस विचार की वजह से गिरती है जो Ball फेंके जाने से कुछ सेकंड पहले हमारे मन में चल रहा होता है।
अक्सर हम Out होने के बाद Pitch, Bowler, Shot Selection या Match Situation का Analysis करते हैं। लेकिन बहुत कम खिलाड़ी यह देखने की कोशिश करते हैं कि जिस Ball पर वे Out हुए, उससे पहले उनके मन में क्या चल रहा था।
खुद से कुछ सवाल पूछिए:
क्या मैं जल्दी में था?
क्या मैं Boundary के बारे में सोच रहा था?
क्या मैं Fifty या Century के बारे में सोचने लगा था?
क्या मैं Team के Pressure में था?
क्या मैं पिछले Over की किसी Ball को अभी तक अपने मन में दोहरा रहा था?
मुझे लगता है कि Awareness की असली शुरुआत यहीं से होती है।
मैंने Local Cricket में कई बार एक दिलचस्प चीज़ Notice की है। जब कोई बल्लेबाज़ 20-25 Run बना लेता है, तो उसका खेल धीरे-धीरे बदलने लगता है। शुरुआत में वह Ball को ध्यान से देख रहा होता है, Singles ले रहा होता है, Strike Rotate कर रहा होता है और धैर्य से खेल रहा होता है | लेकिन जैसे-जैसे score बढ़ता है, उसके मन में नए विचार आने शुरू हो जाते है |
"बस एक Boundary और..."
"आज तो Fifty बनानी है..."
"इस Bowler को इस Over में चौका मारकर दबाव बनाना है..."
और कई बार Wicket उसके कुछ मिनट बाद ही गिर जाती है।
क्या यह सिर्फ संयोग है?
मेरे हिसाब से हमेशा नहीं।
क्योंकि उस समय बल्लेबाज़ का ध्यान Ball से हटकर Result पर चला जाता है।
एक और छोटी Observation जो मैंने कई बार देखी है, वह यह है कि Catch छूटने के बाद कई बल्लेबाज़ों का पूरा खेल बदल जाता है। कुछ खिलाड़ी और ज्यादा सावधान हो जाते हैं, लेकिन कुछ को लगने लगता है कि आज किस्मत उनके साथ है। फिर वे अगली कुछ Ball में ही बड़ा Shot खेलने की कोशिश करते हैं और अपनी Wicket गंवा बैठते हैं।
मैंने Local Tournament में कई बार देखा है कि बल्लेबाज़ 30-40 Run तक बहुत अच्छी Batting कर रहा होता है। वह Ball को देर से खेल रहा होता है, Gap में Run निकाल रहा होता है और Bowler पर हावी दिखाई दे रहा होता है। लेकिन जैसे ही Pavilion से किसी की आवाज़ आती है,
"अरे भाई, Fifty पूरी कर ले..."
उसके बाद उसका पूरा Focus बदल जाता है।
अब वह Ball नहीं खेल रहा होता।
वह Fifty खेल रहा होता है।
और क्रिकेट में जब खिलाड़ी Ball को छोड़कर Score खेलने लगता है, तब गलती होने की संभावना बढ़ जाती है।
Rahul Dravid और Virat Kohli जैसे खिलाड़ियों को ध्यान से देखिए। वे बड़े Score इसलिए नहीं बनाते क्योंकि उनके पास सबसे ज्यादा Shots हैं। वे बड़े Score इसलिए बनाते हैं क्योंकि वे लंबे समय तक अपना ध्यान अगली Ball पर बनाए रखते हैं।
Spiritual नज़रिए से देखा जाए तो क्रिकेट हमें एक बहुत गहरी बात सिखाता है।
पिछली Ball जा चुकी है। अगली Ball अभी आई नहीं है। खिलाड़ी के पास सिर्फ यही Ball है।
लेकिन मन का स्वभाव बड़ा अजीब है।
कभी वह पिछले Missed Shot में अटका रहता है।
कभी अगले Boundary के सपने देखने लगता है।
कभी Scoreboard में खो जाता है।
और कभी Crowd की आवाज़ों में।
यही कारण है कि कई बार Wicket Bat से पहले Mind में गिर जाती है।
इसलिए अगली बार जब आप Out हों, तो सिर्फ यह मत देखिए कि Ball कैसी थी।
यह भी देखिए कि उस Ball से पहले आपके मन में क्या चल रहा था।
क्योंकि मेरे अनुभव में कई बार बल्लेबाज़ Bowler से नहीं, अपने ही विचारों से हार जाता है।
कई बार बल्लेबाज़ Bowler की सबसे अच्छी Ball पर Out नहीं होता। वह उस Ball पर Out होता है जिसे Bowler उसे पिछले कई Ball से खेलने के लिए तैयार कर रहा होता है।
सीख
एक जागरूक बल्लेबाज़ सिर्फ Pitch, Bowler और Field Placement को ही Observe नहीं करता। वह समय-समय पर अपने मन को भी Observe करता है। क्योंकि क्रिकेट में कई बार सबसे बड़ा Pressure सामने वाले Bowler से नहीं, बल्कि अपने ही मन से आता है।
4. क्या मैंने Match Situation को Ignore किया?
मेरे हिसाब से क्रिकेट में कई बार Wicket गलत Shot की वजह से नहीं, बल्कि Match Situation को न समझ पाने की वजह से गिरती है।
Out होने के बाद हम अक्सर यह देखते हैं कि Ball कैसी थी, Bowler ने क्या Plan बनाया था या Shot Selection सही था या गलत। लेकिन बहुत कम खिलाड़ी यह सवाल पूछते हैं:
"क्या उस समय Team को वाकई इसी Shot की ज़रूरत थी?"
मुझे लगता है कि क्रिकेट में हर Situation अलग होती है।
कभी Team को Run चाहिए होते हैं।
कभी Team को Partnership चाहिए होती है।
कभी Team को सिर्फ Wicket बचानी होती है।
और कई बार Team को बस एक बल्लेबाज़ का Crease पर टिकना ज़रूरी होता है।
मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि Team का Score 47/3 या 52/4 होता है और नया बल्लेबाज़ Crease पर आते ही बड़ा Shot खेलने की कोशिश करता है। शायद उसके मन में होता है कि Pressure को Attack करके ही खत्म किया जा सकता है। लेकिन कई बार वही Shot Team को और मुश्किल में डाल देता है।
उस समय Team को Boundary से ज़्यादा Partnership की ज़रूरत होती है।
एक और दिलचस्प Observation मैंने कई बार Notice की है। कुछ बल्लेबाज़ Match के दौरान Situation नहीं खेलते, बल्कि पहले से बनाया हुआ Plan खेलते हैं। उन्होंने मन में तय कर लिया होता है कि आज Attack करना है। फिर चाहे Pitch कुछ भी कहे, Bowler कुछ भी करे और Match Situation कुछ भी हो, वे अपना Plan नहीं बदलते।
अक्सर ऐसे खिलाड़ी Pavilion में बैठकर कहते हुए मिल जाते हैं:
"यार Shot तो सही था..."
हो सकता है Shot सही था।
लेकिन क्या उस समय वही Shot सही था?
यही सवाल सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
दूसरी तरफ कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जो ज़रूरत से ज़्यादा Defensive हो जाते हैं। मान लीजिए आखिरी 2 Over में Team को 24 Run चाहिए हैं और बल्लेबाज़ अभी भी सिर्फ Singles लेने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय पर भी Match Situation को समझना ज़रूरी है। कई बार Risk लेना गलती नहीं, बल्कि Team की ज़रूरत होती है।
Virat Kohli की कई बड़ी Innings को ध्यान से देखिए। वे हर Ball पर Attack नहीं करते। पहले Match Situation को समझते हैं। जब Team Pressure में होती है तो Partnership बनाने की कोशिश करते हैं और जब समय आता है तो Run Rate भी बढ़ाते हैं।
मुझे लगता है कि Match Awareness का एक बड़ा हिस्सा यही है कि खिलाड़ी समय-समय पर खुद से पूछता रहे:
"इस समय Team को मुझसे क्या चाहिए?"
क्योंकि कई बार बल्लेबाज़ अपनी Innings खेल रहा होता है, जबकि Team को उससे कुछ और चाहिए होता है।
और सच कहूँ तो Local Cricket में मैंने कई अच्छी Innings सिर्फ इसलिए खराब होते देखी हैं क्योंकि बल्लेबाज़ Match की Demand नहीं, बल्कि अपनी सोच के हिसाब से खेल रहा था।
सीख
Out होने के बाद सिर्फ यह मत देखिए कि आप कौन सा Shot खेलकर Out हुए। यह भी समझने की कोशिश कीजिए कि उस समय Match Situation क्या थी और Team को आपसे क्या चाहिए था। क्योंकि कई बार Wicket Shot से नहीं, Match Situation को Ignore करने से गिरती है।
5. क्या Bowler ने मुझे Trap किया ?
मेरे हिसाब से Awareness का एक बड़ा हिस्सा यह समझना भी है कि जिस Ball पर आप Out हुए, क्या वह सिर्फ एक अच्छी Ball थी या Bowler आपको पहले से उसी Shot के लिए तैयार कर रहा था।
कई बार Wicket एक Ball पर नहीं गिरती।
उसकी शुरुआत 2-3 Over पहले ही हो चुकी होती है।
मैंने Local Cricket में कई बार यह चीज़ Notice की है कि बल्लेबाज़ सिर्फ उस Ball को याद रखता है जिस पर वह Out हुआ था। लेकिन वह उन 4-5 Ball को भूल जाता है जिन्होंने उसे उस Shot के लिए तैयार किया था।
मान लीजिए Bowler लगातार Off Stump के बाहर Ball डाल रहा है।
पहली Ball छोड़ी।
दूसरी Ball छोड़ी।
तीसरी Ball पर Single मिला।
चौथी Ball पर भी कोई खतरा नहीं लगा।
अब धीरे-धीरे बल्लेबाज़ का भरोसा बढ़ने लगता है।
उसे लगने लगता है कि वह Line पूरी तरह समझ चुका है।
और फिर अचानक अगली Ball थोड़ी सी अंदर आ जाती है या थोड़ी Extra Bounce कर जाती है।
बल्लेबाज़ वही Shot खेलता है जो पिछले कुछ Ball से सोच रहा था।
और Edge लग जाता है।
Scorecard में लिखा जाएगा कि बल्लेबाज़ एक Ball पर Out हुआ।
लेकिन असल में Bowler उसे कई Ball पहले से Trap कर रहा था।
एक और दिलचस्प Observation मैंने Local Cricket में देखी है।
कई बार Bowler और Captain मिलकर Field Placement कुछ इस तरह लगाते हैं कि बल्लेबाज़ के मन में एक खास Shot खेलने का लालच पैदा हो जाए।
उदाहरण के लिए Cover Region थोड़ा खाली छोड़ दिया जाता है।
बल्लेबाज़ सोचता है,
"अगर Ball मिली तो चौका पक्का है..."
और अक्सर Bowler भी यही चाहता होता है कि बल्लेबाज़ वही सोचे।
फिर वह ऐसी Length पर Ball डालता है जहाँ Shot पूरा Control में नहीं आता।
बल्लेबाज़ Attack करता है।
Fielder Catch पकड़ लेता है।
बल्लेबाज़ को लगता है कि उसने गलती की।
लेकिन कई बार वह Bowler की Planning का हिस्सा बन चुका होता है।
मुझे लगता है कि बड़े बल्लेबाज़ और सामान्य बल्लेबाज़ में एक अंतर यह भी होता है कि बड़े बल्लेबाज़ सिर्फ Ball नहीं देखते, Pattern भी देखते हैं।
वे Notice करते हैं:
Bowler लगातार किस Area में Ball डाल रहा है?
क्या Field Placement में कोई बदलाव हुआ है?
क्या Bowler मुझे किसी खास Shot के लिए उकसा रहा है?
क्या पिछले Over से कोई Pattern बन रहा है?
Virat Kohli की Batting को ध्यान से देखिए। कई बार वे Bowler को उतना ही Observe करते हैं जितना Ball को। इसी वजह से वे जल्दी समझ जाते हैं कि Bowler क्या करवाने की कोशिश कर रहा है।
मेरे हिसाब से Out होने के बाद यह सवाल ज़रूर पूछना चाहिए:
"क्या मैं सिर्फ एक Ball से Out हुआ था, या Bowler मुझे पिछले कई Ball से उसी Wicket की तरफ ले जा रहा था?"
कई बार इस सवाल का जवाब आपकी अगली Innings बदल सकता है।
सीख
हर Wicket के बाद सिर्फ आखिरी Ball को मत देखिए। यह समझने की कोशिश कीजिए कि क्या Bowler ने आपको धीरे-धीरे Trap किया था। क्योंकि क्रिकेट में कई बार Wicket आखिरी Ball पर गिरती है, लेकिन उसकी तैयारी कई Ball पहले से चल रही होती है।
6. Innings से क्या सीखा?
मेरे हिसाब से इस पूरे Article का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है।
"मैंने इस Innings से क्या सीखा?"
क्योंकि सच कहूँ तो हर Innings आपको कुछ न कुछ देकर जाती है।
या तो वह आपको Run देती है।
या फिर सीख देती है।
और कई बार सीख, Run से भी ज़्यादा कीमती होती है।
मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि खिलाड़ी Out होने के बाद बहुत निराश हो जाता है। अगर 5-10 Run बनाकर Out हुआ हो तो उसे लगता है कि आज का दिन खराब था। लेकिन वह यह देखने की कोशिश ही नहीं करता कि उस छोटी सी Innings ने उसे क्या सिखाया।
हो सकता है उसे पता चला हो कि वह Swing Ball पर जल्दी Commit कर रहा है।
हो सकता है उसे समझ आया हो कि वह Pressure में अपना Game बदल देता है।
हो सकता है उसे यह महसूस हुआ हो कि उसका ध्यान Ball से ज़्यादा Scoreboard पर था।
और हो सकता है उसे पहली बार यह समझ आया हो कि उसकी सबसे बड़ी कमजोरी Technique नहीं, बल्कि Decision Making है।
अगर खिलाड़ी इन बातों को समझ ले, तो वह 10 Run की Innings भी उसे बहुत कुछ सिखा सकती है।
एक दिलचस्प Observation मैंने कई बार Notice की है।
जब कोई बल्लेबाज़ 70 या 80 Run बनाकर Out होता है, तो अक्सर लोग उसकी तारीफ़ करते हैं।
लेकिन कई बार वही बल्लेबाज़ Pavilion में बैठकर सिर्फ एक गलती के बारे में सोच रहा होता है।
दूसरी तरफ जो खिलाड़ी 15 Run बनाकर Out हुआ है, वह सिर्फ Score देखकर निराश हो रहा होता है।
यानी एक खिलाड़ी Run से सीख रहा है।
और दूसरा सिर्फ Run गिन रहा है।
मुझे लगता है कि Improvement हमेशा Scorecard देखकर नहीं आती।
Improvement Awareness से आती है।
कई बार 100 Run की Innings आपको उतना नहीं सिखाती जितना एक कठिन Pitch पर बनाई गई 20 Run की Innings सिखा सकती है।
Rahul Dravid, Sachin Tendulkar और Virat Kohli जैसे बड़े खिलाड़ियों के Interviews में एक बात अक्सर सुनने को मिलती है। वे सिर्फ Run के बारे में बात नहीं करते। वे Process, Mistakes, Decisions और Learning की बात करते हैं।
शायद यही कारण है कि वे लगातार बेहतर होते गए।
Spiritual नज़रिए से देखा जाए तो क्रिकेट भी जीवन की तरह ही है।
हर Match आपके अनुसार नहीं जाएगा।
हर Innings सफल नहीं होगी।
हर दिन Scoreboard आपके पक्ष में नहीं होगा।
लेकिन अगर हर Innings के बाद आप कुछ सीख लेते हैं, तो वास्तव में आप हार नहीं रहे होते।
आप धीरे-धीरे बेहतर हो रहे होते हैं।
इसलिए अगली बार जब आपकी Innings खत्म हो, तो सिर्फ यह मत देखिए कि आपने कितने Run बनाए।
खुद से यह भी पूछिए:
मैंने क्या सही किया?
मैंने क्या गलती की?
अगली Innings में मैं क्या बेहतर कर सकता हूँ?
आज Cricket ने मुझे क्या सिखाया?
क्योंकि मेरे हिसाब से एक जागरूक खिलाड़ी की पहचान सिर्फ उसके Run नहीं बताते।
उसकी सीख भी बताती है।
सीख
हर Innings या तो आपको Run देती है, या सीख देती है।
और अगर आपने हर Innings से कुछ सीख लिया, तो लंबे समय में वही सीख आपको बड़े Run बनाने में मदद करेगी।
निष्कर्ष
क्रिकेट में Out होना समस्या नहीं है।
बिना सीखे बार-बार उसी तरीके से Out होना समस्या है।
मेरे हिसाब से एक जागरूक बल्लेबाज़ अपनी सबसे अच्छी Innings से कम और अपनी गलतियों से ज़्यादा सीखता है। क्योंकि Boundary और Run कुछ समय के लिए खुशी देते हैं, लेकिन सही सीख लंबे समय तक खेल को बेहतर बनाती है।
मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि कुछ खिलाड़ी Out होने के बाद सिर्फ Scorecard देखते हैं, जबकि कुछ खिलाड़ी अपनी पूरी Innings को दोबारा याद करने की कोशिश करते हैं। समय के साथ दूसरा खिलाड़ी ज़्यादा बेहतर बनता चला जाता है।
इसलिए अगली बार जब आप Out हों, तो सिर्फ यह मत देखिए कि आपने कितने Run बनाए।
कुछ मिनट निकालकर यह भी समझने की कोशिश कीजिए कि आपकी Innings आपको क्या सिखाकर गई है।
क्योंकि मेरे हिसाब से Cricket Awareness का असली मतलब सिर्फ सही Shot खेलना नहीं, बल्कि हर Innings से कुछ सीखकर अगली Innings के लिए बेहतर खिलाड़ी बनना है।
Scorecard सिर्फ यह बताता है कि आपने कितने Run बनाए और किस तरह Out हुए। लेकिन Awareness यह समझने में मदद करती है कि आप Out क्यों हुए।
आखिरकार, हर Innings या तो आपको Run देती है, या सीख देती है।


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