Match शुरू होते ही Pressure क्यों बढ़ जाता है? क्रिकेट का एक अनदेखा सच !

प्रस्तावना

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि Net Practice में सब कुछ आसान लगता है, लेकिन Match शुरू होते ही अंदर कुछ बदल जाता है?

हाथ में Bat वही होती है।

Pitch वही होती है।

Bowler भी कोई बहुत अलग नहीं होता।

फिर भी Ball पहले जैसी दिखाई नहीं देती।

कभी पैर भारी लगने लगते हैं।

कभी मन जल्दी Run बनाने की सोचने लगता है।

कभी ऐसा लगता है कि आज अच्छा खेलना ही होगा।

और कभी बिना किसी खास वजह के अंदर एक अजीब सा Pressure महसूस होने लगता है।

मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि कुछ खिलाड़ी Practice में शानदार Cover Drive खेलते हैं, Pull Shot भी अच्छे लगाते हैं, लेकिन Match में आते ही उनका खेल बदल जाता है। कई बार वही खिलाड़ी, वही Skills और वही Shots होते हैं, लेकिन Decision Making अलग हो जाती है।

एक दिलचस्प बात यह है कि जब हम Pressure की बात करते हैं, तो अक्सर Team, Crowd, Opponent या Match की Importance की बात करते हैं। लेकिन क्या Pressure सच में बाहर होता है?

क्योंकि मैंने कई बार ऐसे खिलाड़ियों को भी देखा है जिन पर कोई खास दबाव नहीं था, फिर भी वे घबराए हुए थे। और कुछ खिलाड़ी ऐसे भी थे जिनके सामने बड़ा Match था, फिर भी वे सामान्य दिखाई दे रहे थे।

तो आखिर फर्क कहाँ था?

मेरे हिसाब से Cricket में Pressure को समझना उतना ही ज़रूरी है जितना Technique, Fitness या Shot Selection को समझना। क्योंकि कई बार खिलाड़ी Bowler की वजह से नहीं, बल्कि अपने ही मन में चल रहे Pressure की वजह से गलती कर बैठता है। 

अगर आपने Cricket Awareness Series का तीसरा भाग नहीं पढ़ा है, जिसमें हमने Out होने के बाद अपनी Innings का Analysis करने के बारे में बात की थी, तो उसे भी ज़रूर पढ़ें।

"Cricket Awareness Series part 3 : Out होने के बाद अपनी innings का analysis कैसे करें? "

इस लेख में हम समझेंगे कि Pressure आखिर होता क्या है, यह हमारे खेल को कैसे प्रभावित करता है और एक जागरूक खिलाड़ी Pressure से लड़ने की नहीं, बल्कि उसे समझने की कोशिश कैसे करता है। 

                                                                 

Pressure mehsoos karta hua young cricketer match shuru hone se pehle crease par khada hua
कई बार Pressure Match में नहीं, बल्कि हमारे मन में चल रही कहानी में पैदा होता है।

1. Pressure आखिर होता क्या है?

Cricket में Pressure एक ऐसा शब्द है जिसे हम सभी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर कोई पूछ ले कि Pressure आखिर होता क्या है, तो शायद हममें से ज़्यादातर लोग इसका साफ जवाब नहीं दे पाएँगे।

कई खिलाड़ी Out होने के बाद कहते हैं,

"आज Pressure बहुत था..."

कोई कहता है,

"Match बड़ा था..."

और कोई कहता है,

"दबाव में गलती हो गई..."

लेकिन मेरे हिसाब से सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि Pressure और Reality हमेशा एक जैसी चीज़ नहीं होतीं।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए Team का Score 35/2 है और आप Batting करने जा रहे हैं। यह Reality है।

लेकिन Crease पर जाते समय अगर आपके मन में यह चल रहा है कि,

"अगर मैं जल्दी Out हो गया तो?"

"अगर आज Run नहीं बनाए तो लोग क्या कहेंगे?"

"आज अच्छा खेलना ही होगा..."

तो यह Reality नहीं, बल्कि आपके मन में चल रही सोच है।

यहीं से Pressure पैदा होना शुरू होता है।

मैंने Local Tournament में कई बार एक दिलचस्प बात Notice की है। कुछ खिलाड़ी Final Match को देखकर घबरा जाते हैं, जबकि कुछ उसी Match को खेलने के लिए उत्साहित दिखाई देते हैं। Match दोनों के लिए एक ही होता है, Pitch भी वही होती है और Opponent भी वही होता है।

फिर फर्क कहाँ है?

मेरे हिसाब से फर्क Match में नहीं, बल्कि उस Match को देखने के तरीके में होता है।

एक खिलाड़ी सोच रहा होता है,

"अगर हार गए तो?"

दूसरा खिलाड़ी सोच रहा होता है,

"आज अच्छा Cricket खेलने का मौका है।"

यानी कई बार Pressure बाहर की परिस्थिति से कम और उसके बारे में हमारी सोच से ज़्यादा पैदा होता है।

एक और छोटी Observation मैंने Local Cricket में कई बार देखी है। जब Match शुरू होने वाला होता है, तो कुछ खिलाड़ी बार-बार Score, Opponent Team या Crowd की बात कर रहे होते हैं। वहीं कुछ खिलाड़ी चुपचाप Pads बाँध रहे होते हैं, Ground को देख रहे होते हैं या अपनी तैयारी पर ध्यान दे रहे होते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि अक्सर दूसरे प्रकार के खिलाड़ी ज़्यादा शांत दिखाई देते हैं।

क्या इसका मतलब है कि उन्हें Pressure नहीं होता?

बिल्कुल नहीं।

मेरे हिसाब से Pressure हमेशा बुरी चीज़ भी नहीं है।

अगर किसी Match से पहले आपको थोड़ा Pressure महसूस हो रहा है, तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि वह Match आपके लिए महत्वपूर्ण है। समस्या Pressure महसूस करने में नहीं है। समस्या तब शुरू होती है जब Pressure हमारे Decision Making पर हावी होने लगता है।

कई बार खिलाड़ी Pressure की वजह से जल्दी Shot खेल देता है।

कई बार वही Pressure उसे ज़रूरत से ज़्यादा Defensive बना देता है।

और कई बार वह वही गलती कर बैठता है जो सामान्य परिस्थितियों में शायद कभी न करता।

इसलिए मेरे हिसाब से सवाल यह नहीं है कि Pressure है या नहीं।

सवाल यह है कि क्या हम उसे पहचान पा रहे हैं?

क्योंकि जिस Pressure को हम देख लेते हैं, उसे समझना आसान हो जाता है। और जिसे समझ लिया जाए, उसके साथ खेलना भी आसान हो जाता है।

सीख

Pressure हमेशा बाहर की परिस्थिति नहीं होता। कई बार उसका बड़ा हिस्सा हमारे अपने मन में पैदा होता है। एक जागरूक खिलाड़ी Pressure से भागने की कोशिश नहीं करता, बल्कि पहले यह समझने की कोशिश करता है कि वह आ कहाँ से रहा है। क्योंकि Cricket में कई बार परिस्थिति से ज़्यादा, उसके बारे में हमारी सोच Pressure पैदा करती है। 


2. क्या Pressure सच में बाहर से आता है?

जब भी Cricket में Pressure की बात होती है, तो ज़्यादातर लोग कुछ सामान्य कारण गिनाने लगते हैं।

Team की उम्मीदें।

Crowd।

Coach।

Family।

Selectors।

बड़ा Match।

मजबूत Opponent।

और सच कहूँ तो ये सभी चीज़ें Pressure का कारण बन सकती हैं।

लेकिन मेरे हिसाब से एक सवाल यहाँ और पूछना चाहिए।

अगर Pressure सिर्फ बाहर की वजहों से आता है, तो एक ही Match में कुछ खिलाड़ी सामान्य क्यों दिखाई देते हैं और कुछ खिलाड़ी घबराए हुए क्यों?

मैंने Local Cricket में कई बार यह चीज़ Notice की है। Final Match होता है, Ground के चारों तरफ लोग खड़े होते हैं, Team को जीत की उम्मीद होती है। लेकिन उसी Match में एक बल्लेबाज़ आराम से Batting कर रहा होता है और दूसरा Crease पर आते ही बेचैन दिखाई देता है।

बाहर की परिस्थिति तो दोनों के लिए एक जैसी है।

फिर फर्क कहाँ है?

मेरे हिसाब से कई बार असली Pressure बाहर नहीं, बल्कि उन बातों से पैदा होता है जो हमारे मन में चल रही होती हैं।

उदाहरण के लिए, Team की उम्मीदें अपने आप Pressure नहीं बनातीं।

Pressure तब बनता है जब मन कहता है,

"अगर मैं Fail हो गया तो?"

Crowd अपने आप Pressure नहीं बनाता।

Pressure तब बनता है जब मन सोचता है,

"अगर मैं Out हो गया तो लोग क्या कहेंगे?"

Selectors अपने आप Pressure नहीं बनाते।

Pressure तब बनता है जब खिलाड़ी बार-बार अपने भविष्य के बारे में सोचने लगता है।

यानी कई बार बाहर की घटना से ज़्यादा, उसके बारे में हमारी सोच Pressure पैदा करती है।

एक छोटी सी Observation मैंने Local Cricket में और भी देखी है। कई खिलाड़ी Batting करने से पहले Opponent Team की चर्चा बार-बार करते रहते हैं।

"उस Team का Fast Bowler बहुत तेज़ है..."

"वो Team पिछले साल Champion थी..."

"आज का Match बहुत महत्वपूर्ण है..."

कई बार Match शुरू होने से पहले ही खिलाड़ी अपने मन में Pressure का माहौल बना चुका होता है।

और फिर जैसे ही पहली Ball आती है, उसका ध्यान Ball पर कम और अपने डर पर ज़्यादा होता है।

मेरे हिसाब से Cricket में सबसे बड़ा Pressure अक्सर Out होने का डर होता है।

उसके बाद Failure की चिंता।

और फिर दूसरों की राय।

दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों में से कोई भी चीज़ वर्तमान Ball में मौजूद नहीं होती।

वे केवल हमारे मन में मौजूद होती हैं।

Spiritual नज़रिए से देखा जाए तो Pressure अक्सर तब पैदा होता है जब हमारा ध्यान वर्तमान क्षण से हटकर भविष्य की किसी कल्पना में चला जाता है।

हम Ball नहीं खेल रहे होते।

हम उस Result के बारे में सोच रहे होते हैं जो अभी हुआ ही नहीं है।

इसलिए मेरे हिसाब से यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि Pressure बाहर से आता है।

कई बार बाहर की परिस्थितियाँ केवल चिंगारी का काम करती हैं।

असली Pressure हमारे मन के अंदर पैदा होता है।

सीख

Team, Crowd, Coach, Family या Selectors Pressure की वजह बन सकते हैं, लेकिन अक्सर सबसे बड़ा Pressure हमारे अपने मन में चल रहे डर, उम्मीदों और कल्पनाओं से पैदा होता है। एक जागरूक खिलाड़ी केवल बाहर की परिस्थितियों को नहीं देखता, बल्कि यह भी समझने की कोशिश करता है कि उसके मन में क्या चल रहा है। क्योंकि कई बार Cricket में सबसे बड़ा Opponent सामने वाला Bowler नहीं, बल्कि अपने ही मन में बना Pressure होता है। 

3. Pressure में Decision Making क्यों बदल जाती है?

मेरे हिसाब से Pressure की सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है कि वह हमें डराता है।

असली समस्या यह है कि Pressure हमारे Decision Making को बदल देता है।

और कई बार हमें इसका पता भी नहीं चलता।

जब मन शांत होता है, तब खिलाड़ी Ball को देखता है, Situation को समझता है और फिर Decision लेता है।

लेकिन जब मन Pressure में होता है, तब कई बार Decision Ball को देखकर नहीं, बल्कि डर, जल्दबाज़ी या परिणाम की चिंता को देखकर लिया जाता है।

यहीं से गलतियाँ शुरू होती हैं।

कभी एक आसान Catch निकल जाता है।

कभी Run Out हो जाता है।

कभी खिलाड़ी ऐसा Rash Shot खेल देता है जिसकी उस समय कोई ज़रूरत ही नहीं थी।

और कई बार इसका उल्टा भी होता है।

जो खिलाड़ी सामान्य परिस्थितियों में खुलकर Batting करता है, वही Pressure में इतना Defensive हो जाता है कि Scoring Opportunities भी छोड़ने लगता है।

मैंने Local Cricket में एक चीज़ कई बार Notice की है।

Match के शुरुआती Overs में एक बल्लेबाज़ आराम से Singles ले रहा होता है, Strike Rotate कर रहा होता है और अच्छी Batting कर रहा होता है।

फिर धीरे-धीरे उसका Score 35 या 40 के आसपास पहुँचता है।

अचानक उसका खेल बदलने लगता है।

अब उसका ध्यान Ball पर कम और Half Century पर ज़्यादा होने लगता है।

पहले जो Ball आसानी से खेल रहा था, अब उसी Ball पर या तो ज़रूरत से ज़्यादा Attack करता है या फिर बेवजह रुक जाता है।

बाहर से देखने पर लगता है कि गलती Shot में हुई।

लेकिन कई बार असली बदलाव Shot में नहीं, Decision Making में हुआ होता है।

एक और दिलचस्प Observation मैंने Local Tournament में देखी है।

Target बहुत बड़ा नहीं था। लगभग Run-a-Ball का Match था। Batting Team आराम से Match में थी।

लेकिन जैसे-जैसे आख़िरी Overs पास आने लगे, खिलाड़ियों ने Match जीतने की बजाय Match हारने से बचने के बारे में सोचना शुरू कर दिया।

और यहीं से गलतियाँ शुरू हो गईं।

किसी ने बेवजह बड़ा Shot खेल दिया।

कोई आसान Single लेने में हिचकिचा गया।

एक बल्लेबाज़ ने दूसरे को Run के लिए बुलाया, फिर आधे रास्ते में मना कर दिया और Run Out हो गया।

दिलचस्प बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर गलतियाँ Skill की नहीं थीं।

वे Decision Making की गलतियाँ थीं।

मेरे हिसाब से Pressure अक्सर हमारी Skills नहीं बदलता, लेकिन वह उन Skills का इस्तेमाल करने का तरीका ज़रूर बदल देता है।

Spiritual नज़रिए से देखें तो Pressure के समय मन वर्तमान Ball से हटकर भविष्य के Result में चला जाता है।

और जब ध्यान वर्तमान से हट जाता है, तो Decision भी उतने स्पष्ट नहीं रहते।

इसलिए कई बार खिलाड़ी Bowler की सबसे अच्छी Ball पर नहीं, बल्कि अपने ही गलत Decision पर Wicket दे देता है। 

अगर आप यह समझना चाहते हैं कि Match के दौरान किन-किन चीज़ों को Observe करना ज़रूरी है, तो Cricket Awareness Series Part 2 भी पढ़ सकते हैं। 

"Cricket Awareness Series Part 2 : Batting के दौरान क्या observe करना जरूरी है? "

सीख

Pressure में सबसे पहले Technique नहीं, बल्कि Decision Making प्रभावित होती है। एक जागरूक खिलाड़ी केवल अपनी गलती नहीं देखता, बल्कि यह भी समझने की कोशिश करता है कि वह Decision क्यों बदला। क्योंकि Cricket में कई बार Wicket गलत Shot की वजह से नहीं, बल्कि गलत समय पर लिए गए Decision की वजह से गिरती है। 

                                                                       

Batsman scoreboard ko dekhta hua pressure mehsoos karta hua cricket match mein
Scoreboard सिर्फ़ Numbers दिखाता है, लेकिन Pressure अक्सर उन Numbers को देखकर हमारा मन बनाता है।

4. Scoreboard Pressure बनाता है या मन?

Cricket में Scoreboard एक दिलचस्प चीज़ है।

वह सिर्फ़ Numbers दिखाता है।

लेकिन कई बार वही Numbers खिलाड़ियों के मन में अलग-अलग कहानियाँ पैदा कर देते हैं।

यही वजह है कि मेरे हिसाब से Pressure हमेशा Scoreboard नहीं बनाता, कई बार Pressure उस Scoreboard को देखकर हमारा मन बनाता है।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए एक बल्लेबाज़ 90 Runs पर Batting कर रहा है।

90 से 100 के बीच की दूरी सिर्फ़ 10 Runs की होती है।

लेकिन कई बार वही 10 Runs पूरी Innings के सबसे मुश्किल 10 Runs बन जाते हैं।

मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि बल्लेबाज़ 60-70 Runs तक बिल्कुल सामान्य खेल रहा होता है। Singles ले रहा होता है, Strike Rotate कर रहा होता है और धैर्य से Batting कर रहा होता है। लेकिन जैसे ही उसे पता चलता है कि वह Century के करीब पहुँच रहा है, उसका खेल बदलने लगता है।

अचानक हर Ball महत्वपूर्ण लगने लगती है।

हर Dot Ball बड़ी लगने लगती है।

और कई बार खिलाड़ी वही Shot खेल देता है जो वह पूरी Innings में नहीं खेल रहा था।

क्या Pressure Scoreboard ने बनाया?

या फिर Century के बारे में चल रही सोच ने?

एक और Situation देखिए।

Team का Score 28/4 है।

कई खिलाड़ी Crease पर पहुँचते ही सोचने लगते हैं,

"अब तो Match गया..."

"अगर मैं भी Out हो गया तो?"

"आज शायद कुछ नहीं हो सकता..."

लेकिन Reality यह है कि Match अभी भी चल रहा है।

Scoreboard केवल 28/4 दिखा रहा है।

बाकी कहानी हमारा मन बना रहा है।

मैंने Local Tournament में कई बार देखा है कि कुछ खिलाड़ी मुश्किल Situation में आते ही घबरा जाते हैं, जबकि कुछ खिलाड़ी उसी Situation को चुनौती की तरह देखते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि Scoreboard दोनों के लिए एक ही होता है।

फिर भी उनका खेल अलग होता है।

एक और रोचक Observation Last Over में देखने को मिलती है।

मान लीजिए 8 Runs चाहिए और 6 Ball बाकी हैं।

अक्सर बल्लेबाज़ Ball से ज़्यादा Scoreboard देखने लगता है।

उसे हर Ball पर Boundary दिखाई देने लगती है।

जबकि कई बार Match एक Single, एक Double और एक खराब Ball का इंतज़ार करके भी जीता जा सकता है।

यहीं Pressure Decision Making को प्रभावित करना शुरू कर देता है।

मेरे हिसाब से Scoreboard समस्या नहीं है।

समस्या तब शुरू होती है जब हम Scoreboard को देखकर वर्तमान Ball से दूर चले जाते हैं।

Spiritual नज़रिए से देखें तो Scoreboard हमेशा भविष्य की तरफ़ इशारा करता है।

कितने Run चाहिए?

कितने Overs बचे हैं?

Century कितनी दूर है?

लेकिन Ball हमेशा वर्तमान में होती है।

एक जागरूक खिलाड़ी Scoreboard को नज़रअंदाज़ नहीं करता, लेकिन उसे अपने ऊपर हावी भी नहीं होने देता।

वह Situation को समझता है, लेकिन अपना ध्यान अगली Ball पर रखता है।

सीख

Scoreboard जानकारी देता है, Pressure नहीं। Pressure तब पैदा होता है जब हमारा मन उन Numbers के साथ डर, उम्मीद या कल्पनाएँ जोड़ना शुरू कर देता है। एक जागरूक खिलाड़ी Scoreboard को देखता है, Situation को समझता है, लेकिन अपना ध्यान हमेशा अगली Ball पर वापस ले आता है। क्योंकि Match Scoreboard नहीं, Ball खेलकर जीते जाते हैं। 

5. बड़े खिलाड़ी Pressure में अलग क्यों दिखते हैं?

जब हम Dhoni, Rahul Dravid या Virat Kohli जैसे खिलाड़ियों को Pressure वाली Situation में खेलते हुए देखते हैं, तो कई बार ऐसा लगता है कि शायद उन्हें Pressure होता ही नहीं होगा।


लेकिन मेरे हिसाब से सच्चाई कुछ और है।


Pressure उन्हें भी होता है।


फर्क सिर्फ़ इतना है कि वे Pressure से भागने की कोशिश नहीं करते, बल्कि उसे स्वीकार करते हैं।


मैंने Dhoni के बारे में एक चीज़ हमेशा Notice की है। चाहे Match कितना भी बड़ा क्यों न हो, उनकी Body Language ज़्यादा नहीं बदलती थी। 2011 World Cup Final हो या कोई मुश्किल Chase, ऐसा नहीं था कि उन्हें Situation की गंभीरता पता नहीं थी। बल्कि वे Situation को पूरी तरह समझते थे, लेकिन उसका बोझ अपने Decision Making पर नहीं आने देते थे।

2011 World Cup Final में जब India मुश्किल Situation में थी, तब भी Dhoni की Body Language में घबराहट कम और स्पष्टता ज़्यादा दिखाई दे रही थी।

Virat Kohli को देखिए।


कई बार बड़े Chase में, जब Crowd, Run Rate और Match की Importance सब बढ़ रही होती है, तब भी उनका ध्यान अक्सर Scoreboard से ज़्यादा Partnership और अगली Ball पर दिखाई देता है। यही वजह है कि उन्होंने कई बड़े Chase में Match को आख़िरी तक ले जाकर Finish किया है।

2022 T20 World Cup में Pakistan के खिलाफ उनकी Innings इसका अच्छा उदाहरण है, जहाँ Pressure बढ़ता गया लेकिन उनका ध्यान अगली Ball पर बना रहा।


Rahul Dravid की बात करें तो मुझे हमेशा उनकी Patience दिलचस्प लगती है।


ऐसा नहीं था कि उन्हें Pressure महसूस नहीं होता था। लेकिन वे Pressure के कारण अपनी Game Plan बार-बार नहीं बदलते थे। अगर Situation Defence की माँग कर रही है, तो Defence। अगर Run बनाने हैं, तो Run। वे Situation के हिसाब से खेलते थे, भावनाओं के हिसाब से नहीं।


एक दिलचस्प Observation मैंने Local Cricket में भी कई बार देखी है।


जब Match मुश्किल होता है, तो कई खिलाड़ी Pressure को हटाने की कोशिश करने लगते हैं।


कोई खुद को ज़बरदस्ती Motivated करने लगता है।


कोई बार-बार Positive सोचने की कोशिश करता है।


कोई खुद से कहता है,


"मुझे Pressure नहीं लेना..."


लेकिन जितना ज़्यादा वह Pressure से लड़ता है, कई बार उतना ही ज़्यादा उलझ जाता है।


वहीं कुछ खिलाड़ी बस Situation को स्वीकार कर लेते हैं।


हाँ, Match बड़ा है।


हाँ, Team को Run चाहिए।


हाँ, गलती की गुंजाइश कम है।


लेकिन Reality यही है।


और जब खिलाड़ी Reality को स्वीकार कर लेता है, तो उसका ध्यान डर से हटकर खेल पर वापस आने लगता है।


मेरे हिसाब से यही कारण है कि बड़े खिलाड़ी अलग दिखाई देते हैं।


वे Pressure को खत्म नहीं करते।


वे उसे स्वीकार करते हैं।


उन्हें भी पता होता है कि Match महत्वपूर्ण है।


लेकिन वे अपना ध्यान उस बात पर रखते हैं जो उनके नियंत्रण में है — अगली Ball, अगला Decision और वर्तमान क्षण।

सीख

बड़े खिलाड़ियों और सामान्य खिलाड़ियों के बीच कई बार Skill का नहीं, बल्कि Pressure को देखने के तरीके का अंतर होता है। बड़े खिलाड़ी Pressure से भागने या उसे दबाने की कोशिश नहीं करते। वे उसे स्वीकार करते हैं और फिर अपना ध्यान वापस खेल पर ले आते हैं। क्योंकि Cricket में Pressure से लड़कर नहीं, उसे समझकर बेहतर खेला जा सकता है। 


6. Pressure को Observe कैसे करें?

मेरे हिसाब से Pressure को हराने से पहले उसे समझना ज़रूरी है।

और उसे समझने का सबसे आसान तरीका है — उसे Observe करना।

अक्सर खिलाड़ी Pressure महसूस करते ही उसे हटाने की कोशिश करने लगता है।

कोई खुद को ज़बरदस्ती Positive बनाने लगता है।

कोई बार-बार खुद से कहता है,

"डरना नहीं है..."

"Pressure नहीं लेना है..."

"Relax रहना है..."

लेकिन एक दिलचस्प बात मैंने अपने अनुभव में Notice की है।

जितना ज़्यादा हम Pressure से लड़ते हैं, कई बार उतना ही ज़्यादा वह हमारे ऊपर हावी होने लगता है।

इसलिए अगली बार जब Match में Pressure महसूस हो, तो उसे हटाने की जल्दी मत कीजिए।

पहले उसे Observe कीजिए।

खुद से पूछिए:

अभी मेरे मन में क्या चल रहा है?

क्या मैं अगली Ball के बारे में सोच रहा हूँ?

या Scoreboard के बारे में?

क्या मेरा ध्यान Bowler पर है?

या Pavilion में बैठे लोगों पर?

क्या मैं Cricket खेल रहा हूँ?

या अपने मन में चल रही किसी कहानी को?

एक और सवाल पूछिए:

मैं किस बात से डर रहा हूँ?

क्या मैं Out होने से डर रहा हूँ?

क्या मैं Fail होने से डर रहा हूँ?

क्या मुझे लोगों की राय की चिंता है?

या मुझे इस बात का डर है कि आज अच्छा नहीं खेल पाया तो क्या होगा?

मेरे हिसाब से कई बार आधा Pressure सिर्फ़ इस वजह से कम हो जाता है क्योंकि खिलाड़ी पहली बार साफ़-साफ़ देख लेता है कि उसके अंदर चल क्या रहा है।

और फिर सबसे महत्वपूर्ण सवाल:

क्या मैं Result खेल रहा हूँ या Ball?

यह सवाल सुनने में छोटा लगता है, लेकिन मेरे हिसाब से Cricket और Spirituality दोनों में इसकी बहुत गहराई है।

क्योंकि जब बल्लेबाज़ Century के बारे में सोच रहा होता है, तब वह Ball नहीं खेल रहा होता।

जब बल्लेबाज़ Selection के बारे में सोच रहा होता है, तब भी वह Ball नहीं खेल रहा होता।

जब बल्लेबाज़ Match जीतने के बाद क्या होगा, इसके बारे में सोच रहा होता है, तब भी उसका ध्यान वर्तमान Ball पर नहीं होता।

Reality यह है कि Cricket हमेशा एक Ball में खेला जाता है।

लेकिन मन अक्सर अगली 10 Ball, अगले Over या Match के Result में घूम रहा होता है।

मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि कुछ खिलाड़ी Pressure में बार-बार Scoreboard देखते हैं, Crowd को देखते हैं, Opponent को देखते हैं, लेकिन अपने मन को नहीं देखते।

और शायद यही वजह है कि वे समझ ही नहीं पाते कि उनके Decision अचानक क्यों बदल गए।

Spiritual नज़रिए से देखें तो Awareness का मतलब Pressure को हटाना नहीं है।

Awareness का मतलब है उसे स्पष्ट रूप से देखना।

जब खिलाड़ी अपने डर, अपनी उम्मीदों और अपने मन की भागदौड़ को देखना शुरू कर देता है, तब उसके और Pressure के बीच थोड़ा सा फ़ासला बनना शुरू हो जाता है।

और कई बार वही फ़ासला बेहतर Decision Making की शुरुआत बन जाता है।

सीख

Pressure को समझने की शुरुआत बाहर नहीं, भीतर देखने से होती है। एक जागरूक खिलाड़ी खुद से यह पूछता है कि अभी उसके मन में क्या चल रहा है, वह किस बात से डर रहा है और उसका ध्यान Result पर है या Ball पर। क्योंकि Cricket में कई बार सबसे बड़ी लड़ाई Bowler से नहीं, बल्कि अपने ही मन में चल रही कहानी से होती है। 

"जब ध्यान Result से हटकर Ball पर लौट आता है, तब Pressure धीरे-धीरे अपना असर खोने लगता है।"

                                                                    

Calm cricketer observing his thoughts before facing the next ball in a cricket match
जब ध्यान Result से हटकर Ball पर लौट आता है, तब Pressure धीरे-धीरे अपना असर खोने लगता है।

कई बार Cricket में सुधार सिर्फ़ Practice से नहीं, बल्कि Awareness से आता है। अगर आपने Cricket Awareness Series के पिछले भाग नहीं पढ़े हैं, तो उन्हें भी ज़रूर पढ़ें:

निष्कर्ष

मेरे हिसाब से Cricket में Pressure कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिससे हमेशा बचना चाहिए।

कई बार Pressure सिर्फ़ यह दिखाता है कि यह Match, यह Situation या यह मौका आपके लिए महत्वपूर्ण है।

समस्या Pressure महसूस करने में नहीं है।

समस्या तब शुरू होती है जब Pressure हमारे Decision Making पर हावी होने लगता है।

इस पूरे लेख में हमने देखा कि कई बार Pressure Team, Crowd, Coach या Scoreboard से कम और हमारे अपने मन में चल रही उम्मीदों, डर और कल्पनाओं से ज़्यादा पैदा होता है।

यही वजह है कि एक ही Situation में दो खिलाड़ी अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं।

एक घबरा जाता है।

दूसरा शांत रहता है।

और कई बार फर्क Skill में नहीं, बल्कि Awareness में होता है।

मेरे हिसाब से एक जागरूक खिलाड़ी Pressure को हटाने की कोशिश नहीं करता। वह पहले उसे समझने की कोशिश करता है।

वह खुद से पूछता है:

"अभी मेरे मन में क्या चल रहा है?"

"क्या मैं Ball खेल रहा हूँ या Result?"

क्योंकि जब यह समझ आ जाती है, तब Pressure दुश्मन कम और शिक्षक ज़्यादा लगने लगता है।

क्रिकेट में Pressure से भागने वाला खिलाड़ी अक्सर उलझ जाता है, लेकिन Pressure को समझने वाला खिलाड़ी धीरे-धीरे उसके साथ खेलना सीख जाता है। 

शायद यही जागरूकता की शुरुआत है — जब खिलाड़ी केवल Match को नहीं, बल्कि अपने मन को भी देखना शुरू कर देता है।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

''क्रिकेटरों के लिए 5 मिनट का ध्यान : मैच से पहले टेंशन फ्री कैसे रहें''

क्रिकेट और आध्यात्म: पहाड़ों से शुरू हुई मेरी कहानी

''क्रिकेट की भावना कैसे बनाये रखें ? धोनी के 5 आधयात्मिक नियम ''