एक Wicket गिरते ही Match क्यों बदलता हुआ लगता है? Cricket Momentum का सच

प्रस्तावना

क्या आपने कभी Notice किया है कि Cricket Match में कभी-कभी सिर्फ़ एक Ball के बाद पूरा माहौल बदल जाता है?

एक Wicket गिरती है और अचानक Fielding Team ज़्यादा Energetic दिखाई देने लगती है।

Dressing Room में बैठे खिलाड़ी भी थोड़े सीधे होकर Match देखने लगते हैं।

Bowler की Body Language बदल जाती है।

और कई बार बल्लेबाज़ भी अगली Ball अलग तरह से खेलने लगता है।

दूसरी तरफ़, अगर लगातार दो Boundaries लग जाएँ, तो वही Match कुछ और दिखाई देने लगता है।

Crowd की आवाज़ बदल जाती है।

Fielders थोड़ा बेचैन दिखने लगते हैं।

और Batting Team को महसूस होने लगता है कि अब Momentum उनके पास है।

लेकिन जितना मैंने Local Cricket को Observe किया है, उतना मुझे लगता है कि Momentum का असली खेल Scoreboard पर नहीं, खिलाड़ियों के मन में चलता है।

मैंने कई बार Local Tournament में देखा है कि एक Wicket गिरने के बाद भी Match की Situation ज़्यादा नहीं बदलती।

Runs अभी भी बनाने होते हैं।

Overs अभी भी बाकी होते हैं।

Pitch भी वही होती है।

लेकिन खिलाड़ियों का Behaviour बदल जाता है।

और कई बार वही Behaviour Match की दिशा बदल देता है।

एक Observation जो मैंने बार-बार Notice की है, वह यह है कि Cricket में लोग अक्सर कहते हैं —

"Momentum हमारे पास है..."

"अब Match पलट गया..."

"अब Pressure उनकी Team पर है..."

लेकिन क्या सच में Match एक Ball से बदल जाता है?

या फिर हमारा मन उस एक Ball के बाद एक नई कहानी बनाना शुरू कर देता है?

क्योंकि अगर ध्यान से देखें, तो अगली Ball हमेशा नई Ball होती है।

उसे यह नहीं पता होता कि पिछली Ball पर Wicket गिरी थी या Boundary लगी थी।

फिर भी हम उसे अलग तरह से खेलते हैं।

और शायद यहीं Momentum का सबसे दिलचस्प रहस्य छिपा हुआ है।

तो सवाल यह है —

क्या Match सच में एक Ball से बदल जाता है, या सिर्फ़ हमें ऐसा महसूस होने लगता है?

                                                                             

Wicket गिरने के बाद क्रिकेट मैदान पर बदलता हुआ माहौल
कई बार Wicket से पहले Match नहीं बदलता, लेकिन Wicket के बाद खिलाड़ियों का Behaviour बदलने लगता है।

  

इसी बारे में हम इस लेख में गहराई से समझने की कोशिश करेंगे।

1. Momentum आखिर होता क्या है?

अगर आप Cricket देखते हैं, खेलते हैं या सिर्फ़ Commentators की बातें सुनते हैं, तो आपने "Momentum" शब्द अनगिनत बार सुना होगा।

"Momentum अब Batting Team के पास है..."

"इस Wicket ने Match का Momentum बदल दिया..."

"अब Pressure Fielding Team पर है..."

दिलचस्प बात यह है कि Momentum को सभी महसूस करते हैं।

Commentators भी।

Players भी।

Crowd भी।

लेकिन अगर कोई आपसे पूछे कि Momentum दिखता कैसा है, तो शायद उसका जवाब देना आसान नहीं होगा।

क्योंकि Momentum Scoreboard पर किसी Number की तरह दिखाई नहीं देता।

वह एक एहसास की तरह महसूस होता है।

और जितना मैंने Cricket को Observe किया है, उतना मुझे लगता है कि कई बार Momentum एक तथ्य (Fact) से ज़्यादा एक भावना (Feeling) होता है।

मैंने Local Cricket में कई बार एक अजीब चीज़ Notice की है।

एक ही Match में दो अलग-अलग Teams एक ही Situation को अलग तरह से महसूस कर सकती हैं।

मान लीजिए Batting Team ने लगातार दो Boundaries लगा दीं।

Crowd को लगेगा Momentum Batting Team के पास है।

Fielders को लगेगा Match हाथ से निकल रहा है।

लेकिन Scoreboard पर देखें तो शायद सिर्फ़ 8 Runs ही जुड़े हों।

Match की Reality उतनी नहीं बदली होती, जितना खिलाड़ियों के मन में उसका प्रभाव बदल चुका होता है।

एक और Observation मैंने कई बार Notice की है।

जब Bowler लगातार 4-5 अच्छी Balls डालता है, तब Commentators कहते हैं कि Momentum Bowler के पास है।

लेकिन अगर छठी Ball Boundary चली जाए, तो वही Momentum अचानक दूसरी Team के पास पहुँच जाता है।

क्या Momentum सच में इतनी जल्दी बदल गया?

या फिर हमारा मन हर छोटी घटना के बाद Match की नई कहानी बनाना शुरू कर देता है?

Local Cricket में तो यह और भी दिलचस्प दिखाई देता है।

मैंने कई बार देखा है कि एक Team 2 Wickets जल्दी खो देती है।

Dressing Room में हल्की चिंता दिखाई देने लगती है।

लेकिन कुछ Overs बाद वही Team Partnership बना लेती है और अचानक सभी को लगने लगता है कि Momentum वापस आ गया।

Pitch वही होती है।

Ground वही होता है।

Players भी वही होते हैं।

लेकिन Match को देखने का नज़रिया बदल चुका होता है।

एक छोटी Observation जो शायद ज़्यादातर लोग Miss कर देते हैं —

Momentum अक्सर उस Team को ज़्यादा महसूस होता है जो अपने मन में भविष्य की कहानी बना रही होती है।

Fielding Team सोचती है,

"अब एक और Wicket मिलेगी..."

Batting Team सोचती है,

"अब हम Match पर हावी हो रहे हैं..."

और कई बार दोनों Teams वर्तमान Ball को कम और अपनी कल्पना को ज़्यादा देखने लगती हैं।

यही वजह है कि मुझे Momentum हमेशा सिर्फ़ Cricket का नहीं, बल्कि Psychology का भी विषय लगता है।

क्योंकि कई बार Momentum Ground पर कम और खिलाड़ियों के मन में ज़्यादा चल रहा होता है।

सीख

Momentum को समझने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उसे किसी जादुई शक्ति की तरह न देखें। कई बार Momentum वास्तविक होता है, लेकिन कई बार वह सिर्फ़ हमारे मन की बनाई हुई कहानी भी हो सकता है। एक जागरूक खिलाड़ी केवल यह नहीं देखता कि Match में क्या हुआ है, बल्कि यह भी Observe करता है कि उस घटना के बाद उसके मन में क्या बदल रहा है।

मेरे हिसाब से Momentum हमेशा Scoreboard पर नहीं बनता, कई बार वह खिलाड़ियों के मन में बनता है और फिर Scoreboard तक पहुँचता है। 

2. एक Wicket गिरते ही पूरी Team का Behaviour क्यों बदल जाता है?

Cricket में Wicket सिर्फ़ Scoreboard पर एक Number नहीं बदलती।

कई बार वह पूरे Match का माहौल बदल देती है।

और जितना मैंने Local Cricket को Observe किया है, उतना मुझे लगता है कि Wicket का असर सबसे पहले Scoreboard पर नहीं, लोगों के Behaviour पर दिखाई देता है।

मैंने कई बार देखा है कि जैसे ही Wicket गिरती है, Fielding Team अचानक ज़्यादा Energetic दिखाई देने लगती है।

जो Fielder कुछ Ball पहले तक सामान्य खड़ा था, वह अब ज़ोर से Appeal करने लगता है।

Bowler की चाल बदल जाती है।

उसकी Body Language में Confidence दिखाई देने लगता है।

ऐसा लगता है जैसे अचानक पूरी Team को यकीन हो गया हो कि Match अब उनकी तरफ़ मुड़ रहा है।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि Batting Team में भी उसी समय कुछ बदल रहा होता है।

Dressing Room में बैठे खिलाड़ी थोड़े गंभीर हो जाते हैं।

अगला बल्लेबाज़ जल्दी से Pads Check करने लगता है।

Coach या Senior Player Ground की तरफ़ थोड़ा ज़्यादा ध्यान देने लगता है।

और कई बार Non-Striker भी पहले से ज़्यादा चुप हो जाता है।

एक छोटी Observation जो शायद ज़्यादातर लोग Notice नहीं करते —

Wicket गिरने के बाद अक्सर अगली 2-3 Balls पर Run बनाने की गति भी बदल जाती है।

इसलिए नहीं कि Pitch बदल गई है।

बल्कि इसलिए क्योंकि बल्लेबाज़ का Decision Making बदल गया होता है।

मैंने Local Tournament में कई बार देखा है कि Wicket गिरने से पहले Batting Team आराम से Singles ले रही होती है।

Communication अच्छा होता है।

Running smooth होती है।

लेकिन Wicket गिरते ही कुछ Overs के लिए Doubt बढ़ जाता है।

"Run hai ya nahi?"

"Call karun ya ruk jaun?"

"Risk loon ya nahi?"

और कई बार यहीं Momentum का एहसास पैदा होना शुरू होता है।

एक और दिलचस्प Observation मैंने Notice की है।

कई बार Wicket ऐसे समय पर गिरती है जब Match की Situation ज़्यादा नहीं बदलती।

मान लीजिए Team 85/2 से 85/3 हो गई।

Runs अभी भी पर्याप्त हैं।

Overs भी बाकी हैं।

लेकिन Behaviour देखकर लगेगा जैसे Match पूरी तरह बदल गया हो।

यहीं मुझे लगता है कि Wicket का असर Reality से पहले Psychology पर पड़ता है।

Fielding Team को लगता है —

"अब एक और Wicket दूर नहीं है।"

Batting Team सोचने लगती है —

"अब गलती नहीं करनी।"

और धीरे-धीरे दोनों Teams वर्तमान Ball से हटकर भविष्य की कल्पना करने लगती हैं।

शायद यही वजह है कि कभी-कभी Wicket से पहले Runs नहीं रुकते।

लेकिन Wicket के बाद सोच बदल जाती है। 

और कई बार वही बदली हुई सोच Match का रुख बदल देती है।

सीख

एक जागरूक खिलाड़ी सिर्फ़ Wicket को नहीं देखता, बल्कि Wicket के बाद अपने Behaviour को भी Observe करता है। क्योंकि कई बार Match Wicket गिरने से नहीं बदलता, बल्कि Wicket के बाद खिलाड़ियों के सोचने और Decision लेने के तरीके से बदलता है। यदि आपने कभी सोचा है कि Match शुरू होते ही खिलाड़ियों पर Pressure अचानक क्यों बढ़ जाता है, तो Match शुरू होते ही Pressure क्यों बढ़ जाता है? क्रिकेट का एक अनदेखा सच ! लेख भी पढ़ सकते हैं।

मेरे हिसाब से Wicket का सबसे बड़ा असर Scoreboard पर नहीं, खिलाड़ियों के मन पर दिखाई देता है। और कई बार वही असर बाद में Match की दिशा तय करता है।

3. क्या दो Boundaries Momentum बना देती हैं?

Cricket में शायद Momentum सबसे ज़्यादा तब महसूस होता है जब बल्लेबाज़ लगातार दो Boundaries लगा देता है।

अचानक Crowd की आवाज़ बढ़ जाती है।

Fielders एक-दूसरे की तरफ़ देखने लगते हैं।

Bowler थोड़ा तेज़ चलने लगता है।

और Commentators भी कह देते हैं —

"अब Momentum Batting Team के पास है।"

लेकिन जितना मैंने Cricket को Observe किया है, उतना मुझे लगता है कि दो Boundaries से पहले Scoreboard नहीं बदलता, खिलाड़ियों का मन बदलना शुरू हो जाता है।

मैंने Local Cricket में कई बार एक दिलचस्प चीज़ Notice की है।

जब बल्लेबाज़ लगातार दो चौके लगाता है, तब अगली Ball अक्सर सबसे दिलचस्प Ball बन जाती है।

क्यों?

क्योंकि अब दोनों Teams के मन में कहानी चल रही होती है।

बल्लेबाज़ सोच रहा होता है —

"Bowler Pressure में है..."

Bowler सोच रहा होता है —

"अब कुछ अलग करना पड़ेगा..."

और कई बार दोनों का ध्यान Ball से हटकर उस कहानी पर चला जाता है जो पिछले दो Shots ने उनके मन में बना दी है।

एक Observation जो शायद ज़्यादातर लोग Miss कर देते हैं —

दो Boundaries के बाद Bowler की Line-Length हमेशा नहीं बदलती, लेकिन उसका Behaviour बदल सकता है।

वह Extra Pace डालने की कोशिश करता है।

Yorker Force करने लगता है।

या फिर ऐसी Ball डालने की कोशिश करता है जो उसकी Natural Ball ही नहीं होती।

यानी Pressure Runs से पहले Decisions में दिखाई देने लगता है।

दूसरी तरफ़ बल्लेबाज़ भी बदल सकता है।

मैंने कई Local Matches में देखा है कि दो अच्छे Shots के बाद बल्लेबाज़ अगली Ball को भी Boundary Ball मान लेता है।

अब वह Ball को नहीं देख रहा होता।

वह पिछली Boundary की Feeling को आगे बढ़ाना चाहता है। इसी तरह जल्दबाज़ी और गलत Decision Making के संबंध को मैंने कई बार Wicket गलत Shot से नहीं, जल्दबाज़ी से गिरती है? लेख में भी समझाया है।

और कई बार यहीं Mistake शुरू होती है।

एक और छोटी Observation —

Crowd का शोर भी Momentum की Feeling को बढ़ा देता है।

अगर Ground में शोर बढ़ जाए, तो बल्लेबाज़ को लग सकता है कि वह Match पर हावी हो रहा है।

लेकिन Reality में अगली Ball फिर भी उतनी ही मुश्किल हो सकती है जितनी पिछली Over की पहली Ball थी।

यही वजह है कि बड़े खिलाड़ी अक्सर दो Boundaries के बाद भी ज़्यादा Celebrate नहीं करते।

वे जानते हैं कि Scoreboard पर 8 Runs जुड़े हैं, Match अभी खत्म नहीं हुआ।

मेरे हिसाब से Momentum की सबसे दिलचस्प बात यही है —

कई बार Scoreboard से पहले मन Momentum महसूस कर लेता है।

और जब मन Momentum महसूस करने लगता है, तब Decisions बदलने लगते हैं।

सीख

लगातार दो Boundaries ज़रूर Match का माहौल बदल सकती हैं, लेकिन वे हमेशा Match की Reality नहीं बदलतीं। एक जागरूक खिलाड़ी यह Observe करता है कि दो अच्छे Shots के बाद उसका ध्यान अभी भी अगली Ball पर है या वह Momentum की Feeling में बहने लगा है। 

मेरे हिसाब से कई बार Momentum Runs से नहीं बनता, बल्कि उन Runs के बाद खिलाड़ियों के मन में पैदा हुई कहानी से बनता है।

                                                                               

लगातार दो Boundaries के बाद आत्मविश्वास महसूस करता बल्लेबाज़
कई बार Scoreboard से पहले मन Momentum महसूस करने लगता है।

 

4. Dhoni, Kohli और Sachin Momentum को अलग तरह से क्यों देखते थे?

जब Commentators Momentum की बात करते हैं, तो अक्सर ऐसा लगता है जैसे Match किसी अदृश्य लहर के साथ बह रहा हो।

लेकिन जितना मैंने Dhoni, Kohli और Sachin की Innings को Observe किया है, उतना मुझे लगता है कि बड़े खिलाड़ी Momentum को सामान्य खिलाड़ियों की तरह नहीं देखते।

वे Momentum के पीछे नहीं भागते।

वे Situation को पढ़ते हैं।

यही सबसे बड़ा फर्क है।

मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि जैसे ही Team को लगता है कि Momentum उनके पास है, खिलाड़ी जल्दी-जल्दी Match खत्म करने की कोशिश करने लगते हैं।

एक Boundary लगी नहीं कि अगली Ball पर भी Boundary चाहिए।

एक Wicket मिली नहीं कि अगली Ball पर भी Wicket चाहिए।

और कई बार यही जल्दबाज़ी Momentum को खत्म कर देती है।

लेकिन Dhoni को देखिए।

2011 World Cup Final हो, IPL Chase हो या कोई भी बड़ा Match।

एक चीज़ मैंने हमेशा Notice की है।

जब पूरा Stadium Emotion में बह रहा होता था, तब Dhoni अक्सर सबसे कम Emotional दिखाई देते थे।

Boundary लगने के बाद भी उनका Behaviour ज़्यादा नहीं बदलता था।

Wicket गिरने के बाद भी नहीं।

जैसे वह Scoreboard से पहले Situation को देख रहे हों।

कई बार 15 Runs चाहिए होते थे 12 Balls में।

Crowd को Momentum दिखता था।

Dhoni को सिर्फ़ Equation दिखाई देती थी।

शायद यही वजह है कि वे आख़िरी Over तक Match को ज़िंदा रख पाते थे।

Virat Kohli की Approach थोड़ी अलग थी।

लेकिन Observation वही है।

लोग Kohli की Boundaries देखते हैं।

मैं उनकी Singles Notice करता हूँ।

कई Chase में मैंने देखा है कि Kohli Momentum बनाने की कोशिश नहीं करते।

वे Strike Rotate करते हैं।

Bowler को Set Pattern में नहीं आने देते।

Match को Ball by Ball आगे बढ़ाते हैं।

एक छोटी Observation जो शायद बहुत कम लोग Notice करते हैं —

Kohli अक्सर Boundary के बाद अगली Ball पर Hero Shot खेलने की कोशिश नहीं करते।

कई बार वे Simple Single लेकर Pressure को जमा होने ही नहीं देते।

यानी उनका ध्यान Momentum बनाने पर नहीं, Match को बहने देने पर होता है।

अब Sachin Tendulkar की बात करें।

मैंने उनकी पुरानी Innings को देखते हुए एक दिलचस्प चीज़ Notice की है।

Sachin अक्सर Match के Mood से ज़्यादा Pitch के Behaviour को पढ़ते थे।

Crowd क्या सोच रहा है।

Commentators क्या बोल रहे हैं।

Momentum किसके पास है।

इन चीज़ों से ज़्यादा उनका ध्यान Ball की Quality पर होता था।

इसीलिए कई बार जब दूसरे बल्लेबाज़ Attack कर रहे होते थे, Sachin अचानक Defensive Cricket खेलते दिखाई देते थे।

और जब सब Defensive हो जाते थे, तब वे Attack कर देते थे।

यानी उनका Decision Momentum नहीं, Situation तय करती थी।

एक Observation जो मैंने बड़े खिलाड़ियों में Common देखी है —

वे Momentum को Ignore नहीं करते।

लेकिन उसके गुलाम भी नहीं बनते।

उन्हें पता होता है कि Match का Mood हर Over में बदल सकता है।

इसलिए वे Crowd, Noise, Excitement और Emotions से ऊपर उठकर Situation को पढ़ते हैं।

शायद इसी वजह से बड़े खिलाड़ी Momentum के पीछे भागते नहीं।

वे सिर्फ़ अगली Ball को समझने की कोशिश करते हैं।

सीख

Dhoni, Kohli और Sachin हमें यह सिखाते हैं कि Cricket में Momentum से ज़्यादा महत्वपूर्ण Situation Awareness है। क्योंकि Momentum कभी भी बदल सकता है, लेकिन सही Decision हमेशा Situation को समझकर ही लिया जाता है।

मेरे हिसाब से बड़े खिलाड़ियों की खासियत यह नहीं होती कि वे Momentum बना लेते हैं, बल्कि यह होती है कि वे Momentum के शोर के बीच भी Situation को साफ़ देख पाते हैं।

5. Spiritual Cricket: क्या Momentum बाहर है या मन के अंदर?

जितना मैंने Cricket खेला, देखा और Observe किया है, उतना मुझे लगता है कि Momentum का सबसे दिलचस्प हिस्सा Ground पर नहीं, मन के अंदर चलता है।

हम अक्सर कहते हैं —

"Momentum उनके पास चला गया..."

"अब Match हाथ से निकल रहा है..."

"अब हम Dominating Position में हैं..."

लेकिन अगर ईमानदारी से देखें, तो कई बार ये सब बातें Scoreboard से पहले हमारे मन में शुरू हो चुकी होती हैं।

मैंने Local Cricket में एक चीज़ बार-बार Notice की है।

जब बल्लेबाज़ लगातार दो Boundaries लगाता है, तो अगली Ball आने से पहले ही उसका मन बदलने लगता है।

वह Crease पर तो खड़ा होता है, लेकिन उसका ध्यान वर्तमान Ball पर नहीं होता।

वह अभी भी पिछली Boundary की Feeling में होता है।

उसे लगता है —

"Bowler Pressure में है..."

"अब Match मेरे Control में है..."

"अब Momentum हमारे पास है..."

और कई बार यहीं Awareness कम होने लगती है।

दूसरी तरफ़, जब कोई बल्लेबाज़ Out होता है, तब भी यही चीज़ दिखाई देती है।

नया बल्लेबाज़ Crease पर आता है।

लेकिन कई बार वह अगली Ball नहीं खेल रहा होता।

वह अभी भी पिछली Wicket के Shock को अपने साथ लेकर आया होता है।

मैंने Local Tournament में कई बार देखा है कि Wicket गिरने के बाद अगली 2-3 Balls पर बल्लेबाज़ का Footwork बदल जाता है।

Pitch वही होती है।

Bowler वही होता है।

लेकिन मन बदल चुका होता है।

और शायद यही Momentum का सबसे गहरा Psychological रूप है।

एक Observation जो शायद ज़्यादातर लोग Miss कर देते हैं —

Momentum का असर अक्सर Ball पर नहीं, Ball से पहले के विचारों पर दिखाई देता है।

कई बार Bowler Run-up ले रहा होता है, लेकिन बल्लेबाज़ के मन में Match की कहानी चल रही होती है।

"अगर यह Over निकल गया तो Match हमारा..."

"अगर एक और Wicket गिर गई तो Problem हो जाएगी..."

"अब Attack करना पड़ेगा..."

और उसी समय वर्तमान Ball कहीं पीछे छूट जाती है।

यहीं Spiritual Cricket की शुरुआत होती है।

मेरे हिसाब से Spiritual Cricket का मतलब केवल शांत रहना नहीं है।

उसका मतलब है यह देख पाना कि अभी मेरा ध्यान कहाँ है।

इसलिए अगली बार Batting करते समय खुद से पूछकर देखिए —

क्या मैं सच में यह Ball देख रहा हूँ?

या मैं अभी भी पिछली Boundary को दोहरा रहा हूँ?

क्या मैं इस Moment में हूँ?

या मैं पहले ही अगले Over, Fifty या Match Result तक पहुँच चुका हूँ?

क्या मैं पिछली Wicket के Shock में हूँ?

या मैं इस Ball को नई Ball की तरह देख पा रहा हूँ?

क्योंकि जितना मैंने Cricket को समझा है, उतना मुझे लगता है कि हर Ball नई होती है।

उसे यह नहीं पता होता कि पिछली Ball पर Boundary लगी थी या Wicket गिरी थी।

लेकिन हमारा मन अक्सर अतीत और भविष्य के बीच फँसा रहता है।

और शायद इसी वजह से हम Momentum को Ground पर नहीं, अपने विचारों में महसूस करते हैं।

मेरे हिसाब से कई बार Momentum Match में नहीं चल रहा होता।

Momentum हमारे दिमाग़ में चल रहा होता है।

और जब तक हम इसे Observe नहीं करते, तब तक हम समझते रहते हैं कि Match बदल गया है, जबकि असल में सिर्फ़ हमारी मानसिक स्थिति बदली होती है।

सीख

एक जागरूक खिलाड़ी केवल Scoreboard, Bowler या Pitch को नहीं देखता। वह यह भी Observe करता है कि उसके मन में क्या चल रहा है। क्योंकि कई बार Momentum Ground पर नहीं बनता, बल्कि हमारे विचारों में बनता है। और जिस दिन खिलाड़ी यह देखना सीख जाता है, उसी दिन से उसका Cricket भी बदलना शुरू हो जाता है।

मेरे हिसाब से Spiritual Cricket की शुरुआत वहीं से होती है, जहाँ खिलाड़ी यह पहचान लेता है कि वह अगली Ball खेल रहा है या अपने मन में चल रही Match की कहानी। 

 यदि आप Batting के दौरान अपने विचारों और Reactions को और गहराई से Observe करना चाहते हैं, तो Cricket Awareness Series Part 2 : Batting के दौरान क्या observe करना जरूरी है?  भी पढ़ सकते हैं।

                                                                               

अगली Ball से पहले अपने विचारों को Observe करता शांत बल्लेबाज़
हर Ball नई होती है, लेकिन हमारा मन अक्सर उसे पुरानी कहानी के साथ खेलने की कोशिश करता है।

 

 

6. अगली Innings में Momentum को Observe कैसे करें?

इस पूरे लेख को पढ़ने के बाद शायद सबसे ज़रूरी सवाल यह नहीं है कि Momentum सच में होता है या नहीं।

असली सवाल यह है कि अगली Innings में हम इसे पहचानेंगे कैसे?

क्योंकि Match के दौरान कोई Commentator हमारे कान में आकर नहीं कहता —

"देखो, अभी तुम्हारा Decision Momentum की वजह से बदल रहा है।"

यह सब बहुत चुपचाप होता है।

और शायद इसी वजह से इसे Observe करना ज़रूरी है।

मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि खिलाड़ी Momentum को तब नहीं पहचान पाते जब वह बन रहा होता है।

उन्हें उसका एहसास बाद में होता है।

जब गलत Shot खेल चुके होते हैं।

जब बेवजह Defensive हो चुके होते हैं।

या जब Match हाथ से निकलने लगता है।

मेरे हिसाब से अगली Innings में Momentum को समझने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप Scoreboard से ज़्यादा अपने Behaviour को Observe करें।

उदाहरण के लिए —

एक Wicket गिरने के बाद मेरा पहला विचार क्या था?

क्या मैंने सोचा,

"अब Pressure बढ़ गया..."

या मैंने सिर्फ़ अगली Ball के बारे में सोचा?

Boundary लगने के बाद मेरा Behaviour बदल गया क्या?

क्या मैं अगली Ball पर भी बड़ा Shot ढूँढने लगा?

या मैंने उसे नई Ball की तरह देखा?

क्या मैं अभी भी Situation को पढ़ रहा हूँ?

या मैं सिर्फ़ Momentum की Feeling में बह रहा हूँ?

क्या मेरा Decision इस Ball की वजह से है?

या पिछली Ball की वजह से?

एक Observation जो मैंने Local Tournament में कई बार Notice की है —

Momentum का असर अक्सर Shot Selection में नहीं, Shot Selection से पहले दिखाई देता है।

बल्लेबाज़ Crease पर थोड़ा जल्दी Move करने लगता है।

Bowler अपनी Natural Line छोड़ देता है।

Fielding Captain अचानक Field Change करने लगता है।

यानी Decision बदलने से पहले Behaviour बदलता है।

और अगर कोई खिलाड़ी इन छोटी-छोटी चीज़ों को Observe करना सीख जाए, तो वह Momentum के प्रभाव को बहुत जल्दी पहचान सकता है।

एक और Observation जो शायद ज़्यादातर लोग Miss कर देते हैं —

कई बार खिलाड़ी Match नहीं खेल रहा होता।

वह Match की कहानी खेल रहा होता है।

अगर दो Wickets जल्दी गिर गईं, तो वह मान लेता है कि Match मुश्किल हो गया।

अगर दो Boundaries लग गईं, तो वह मान लेता है कि Momentum उसके पास है।

जबकि Reality में अगली Ball अभी भी अनिश्चित है।

शायद Awareness यहीं से शुरू होती है।

जहाँ हम Match की कहानी और Match की Reality के बीच का फर्क देखना शुरू करते हैं।

क्योंकि Scoreboard हमेशा सच बताता है।

लेकिन हमारा मन कई बार उसमें अपनी कहानी जोड़ देता है।

सीख

Momentum को Observe करने का सबसे अच्छा तरीका यह नहीं है कि हम Scoreboard को देखें, बल्कि यह है कि हम अपने विचारों और Decisions को देखें। एक जागरूक खिलाड़ी यह Notice करता है कि उसका अगला Decision वर्तमान Ball से आ रहा है या पिछली Ball के प्रभाव से। क्योंकि कई बार Match नहीं बदलता, सिर्फ़ उसे देखने का हमारा नज़रिया बदल जाता है।

मेरे हिसाब से Awareness वहीं से शुरू होती है, जहाँ खिलाड़ी यह देख लेता है कि वह वर्तमान Ball खेल रहा है या पिछली Ball की याद और अगली Ball की कल्पना। 

 और यदि आप Match के बाद अपनी Decision Making और Innings को बेहतर समझना चाहते हैं, तो Cricket Awareness Series part 3 : Out होने के बाद अपनी innings का analysis कैसे करें? भी उपयोगी हो सकता है।

निष्कर्ष

Cricket में Momentum हो सकता है।

लेकिन जितना मैंने Cricket को Observe किया है, उतना मुझे लगता है कि Momentum को समझना आसान नहीं है।

क्योंकि कई बार जो चीज़ हमें Momentum दिखाई देती है, वह वास्तव में खिलाड़ियों के मन में चल रही कहानी होती है।

मैंने Local Cricket में कई बार देखा है कि एक Wicket गिरती है और पूरी Team का Behaviour बदल जाता है।

एक Boundary लगती है और खिलाड़ियों का Confidence बदल जाता है।

लेकिन अगर Scoreboard को ध्यान से देखें, तो कई बार Match की Reality उतनी नहीं बदलती जितना लोगों को महसूस होने लगता है।

शायद इसी वजह से बड़े खिलाड़ी हर Wicket या Boundary के बाद बहते नहीं हैं।

वे जानते हैं कि Match अभी भी अगली Ball पर ही खेला जाएगा।

एक Observation जो मैंने बार-बार Notice की है —

Local Cricket में कई खिलाड़ी Momentum को Chase करते हैं।

वे सोचते हैं कि Momentum को पकड़ना है।

Momentum को अपने पास रखना है।

लेकिन बड़े खिलाड़ी Momentum को पकड़ने की कोशिश नहीं करते।

वे सिर्फ़ Situation को समझते हैं।

क्योंकि उन्हें पता होता है कि Momentum कभी भी बदल सकता है।

लेकिन सही Decision हमेशा वर्तमान Ball में ही लिया जा सकता है।

Spiritual Cricket के नज़रिए से देखें तो शायद सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि Momentum किस Team के पास है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समय हमारा ध्यान कहाँ है।

क्या हम अगली Ball देख रहे हैं?

या पिछली Boundary और Wicket की कहानी में उलझे हुए हैं?

क्योंकि कई बार Match Ground पर नहीं, हमारे मन में बदलना शुरू होता है।

और जिस दिन खिलाड़ी यह देखना सीख जाता है, उसी दिन वह Momentum के पीछे भागना छोड़कर Cricket को ज़्यादा स्पष्टता से देखना शुरू कर देता है।

अंतिम विचार

मेरे हिसाब से कई बार Match एक Wicket या Boundary से नहीं बदलता, बल्कि उस घटना के बाद खिलाड़ियों के मन में बनी कहानी से बदलता है।

और शायद Cricket की सबसे गहरी Awareness यही है कि हर Ball नई होती है, लेकिन हमारा मन अक्सर उसे पुरानी कहानी के साथ खेलने की कोशिश करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या Cricket में Momentum सच में होता है?

उत्तर:
हाँ, Cricket में Momentum का प्रभाव दिखाई दे सकता है, लेकिन हर बार उसका मतलब वही नहीं होता जो हम समझते हैं। कई बार एक Wicket, Boundary या अच्छा Over खिलाड़ियों की सोच और Behaviour को बदल देता है। मेरे हिसाब से Momentum कई बार Scoreboard से ज़्यादा खिलाड़ियों के मन में बनता है।

प्रश्न 2: बड़े खिलाड़ी Momentum के प्रभाव में कम क्यों आते हैं?

उत्तर:
धोनी, कोहली और सचिन जैसे बड़े खिलाड़ी Momentum के पीछे भागने की बजाय Situation को समझने पर ध्यान देते हैं। उनका फोकस पिछली Ball, Crowd के शोर या Match की कहानी पर नहीं, बल्कि अगली Ball पर होता है। शायद यही वजह है कि वे Pressure और Momentum दोनों को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं।

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