Practice में अच्छा शॉट match में विकेट क्यूँ बन जाता है? | Cricket shot selection guide


Practice में अच्छा खेलने के बाद Match में आउट हुआ युवा क्रिकेट बल्लेबाज  
Practice में सीखा हुआ Shot हमेशा Match में काम करे, यह जरूरी नहीं। सही निर्णय और परिस्थिति की समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

प्रस्तावना

क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि Practice में जो Shot सबसे ज्यादा रन दिलाता है, वही Match में आपका Wicket बन जाता है?

नेट्स में आप शानदार Batting करते हैं। Cover Drive हो, Pull Shot हो या Cut Shot — हर Shot बिल्कुल सही लगता है। ऐसा लगता है की अगले किसी भी मैच में दबाव वाली स्तिथि में अगर मैं अच्छे से सभी तरह के शॉट्स का अभ्यास करूंगा तो , game awareness बड़ेगी और किसी भी दबाव वाली परिस्थिति से हम मैच जीत सकते हैं |

लेकिन जैसे ही Match शुरू होता है, वही Shot कभी Edge दे देता है, कभी Fielder के हाथों में चला जाता है।

तब मन में सवाल आता है:

"जब Practice में यही Shot सही था, तो Match में गलती कहाँ हो गई?"

सच यह है कि समस्या हमेशा Technique में नहीं होती। कई बार असली कारण हमारे दिमाग, निर्णय और Match की परिस्थितियों में छिपा होता है। मुझे लगता है हम कुछ ज्यादा ही मैच के बारे में सोचने लगते है बल्कि हमें सिर्फ one ball at one moment  खेलना चाहिए | मतलव हमे mind में सिर्फ उस एक बाल खेलने या बोलिंग डालने के बारे में सोचना चाहिए |आईए हम इस समस्या को समझने की कोशिश करें |

                                                                                 

गलत शॉट खेलने के बाद निराश क्रिकेट खिलाड़ी  
कभी-कभी एक गलत फैसला पूरी पारी खत्म कर देता है।
अगर आप मैच में घबराहट महसूस करते हैं, तो यह भी पढ़ें: मैच में फोकस कैसे बनाए रखें

Match में Focus कैसे बनाए रखें – जब दिमाग भटकता है तब क्या करें?

Practice और Match में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

Practice के दौरान:

  • Out होने का डर नहीं होता।

  • Scoreboard का दबाव नहीं होता।

  • Team की उम्मीदें महसूस नहीं होतीं।

  • गलती होने पर अगली Ball मिल जाती है।

लेकिन Match में:

  • हर Ball की कीमत होती है।

  • Wicket खोने का डर होता है।

  • Team आपसे प्रदर्शन की उम्मीद करती है।

यही दबाव आपके Decision को बदलना शुरू कर देता है।

वही Shot, लेकिन दिमाग अलग

मान लीजिए आपने Practice में Cover Drive 20 बार खेला।

Match में भी वही Ball मिली।

लेकिन इस बार दिमाग में चल रहा है:

  • "मुझे Run बनाने हैं।"

  • "जल्दी Out नहीं होना है।"

  • "सब लोग मुझे देख रहे हैं।"

अब आपका ध्यान Ball पर नहीं, परिणाम पर है।

यहीं से गलती शुरू होती है।

                                                                         

बल्लेबाज गेंद की लाइन और लेंथ देखकर सही निर्णय लेते हुए 
सही शॉट चयन की शुरुआत गेंद को समझने से होती है।
अगर आप अपने shot selection को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हमारा लेख Shot Selection कैसे सुधारें भी पढ़ सकते हैं।

Match में Bowler आपको फँसाने की कोशिश करता है

Practice में अक्सर Bowling का उद्देश्य आपको अभ्यास करवाना होता है।

लेकिन Match में Bowler आपको Out करने आया है।

वह:

  • आपकी कमजोरी देखता है।

  • आपको Trap में फँसाता है।

  • लगातार एक जैसी Ball डालकर भ्रम पैदा करता है।

कई बार Batsman Shot नहीं, बल्कि Bowler की योजना का शिकार होता है।

Shot गलत नहीं था, समय गलत था

क्रिकेट में हर अच्छा Shot हर Ball पर नहीं खेला जाता।

यही बात बड़े Players को अलग बनाती है।

वे Shot की खूबसूरती नहीं देखते, बल्कि Situation देखते हैं।

उदाहरण:

  • नई Ball

  • Swing

  • Slip Fielders

ऐसी स्थिति में Cover Drive सुंदर लग सकता है, लेकिन जोखिम भरा भी हो सकता है।

Scoreboard का दबाव कैसे Wicket बन जाता है?

जब Batsman:

  • 0 पर होता है,

  • Team मुश्किल में होती है,

  • Run Rate बढ़ाना होता है,

तो वह सामान्य से अलग Decision लेने लगता है।

कई बार Shot वही होता है, लेकिन उसे खेलने का कारण बदल जाता है।

और यही Wicket का कारण बन जाता है।

मेरा अनुभव 

एक बार हम local टूर्नामेंट खेलने गए | जिसका first prize 300000 रुपये था | उस टूर्नामेंट में सेकंड प्राइज़ भी 150000 रुपये था | ये बात है तबकी जब मैंने 12 grade  पास किया और हम दोस्तों ने निर्णय लिया की results आने के बाद हम लोकल टूर्नामेंट खेलेंगे | 

हमने  ज़ोर - शोर से टूर्नामेंट में भाग लेने और जीतने के लिए cricket प्रैक्टिस  शुरू कर दी | प्रैक्टिस में pull shot बेहतरीन लग रहा था | straight drive तो मेरा पसंदीदा शॉट है उसकी भी काफी प्रैक्टिस किया | मैच से पहले यही लग रहा था की जितनी ज्यादा हम प्रैक्टिस करेंगे matches  जीतने की संभावनाएँ भी उतनी ज्यादा बड़ जाएगी | 

लेकिन जब हमारा पहला knockout मैच था , दूसरी टीम ने 10 ओवर में 120 रन बंद दिए | अब हमारी बल्लेबाज़ी की बारी थी | हमारी टीम से ओपनिंग करने की जिम्मेदारी  मुझे दी गई क्युकी knockout मैचों से पहले प्रैक्टिस मैचों में मेरा प्रदर्शन शानदार रहा था | मुझे भी अपने ऊपर काफी आत्मविश्वास था |

 इसलिए मैं मैच ओपनिंग करने उतरा | पहले 2 ओवर में 25 रन बना दिए और कोई विकेट भी नहीं गिरा | लग रहा था की शुरुआत बेहतरीन हो गई है इसलिए में full mood  में बल्लेबाज़ी कर रहा था  और 120 runs का स्कोर काफी अच्छा थाpowerplay खतम होने से पहले टीम का स्कोर 35 हो गया था | Powerplay खत्म होने के बाद मुझे लगा कि momentum बनाए रखना जरूरी है। 

शायद इसी जल्दबाज़ी में मैंने गेंद को पूरी तरह पढ़े बिना अपना favourite straight drive खेलने का फैसला कर लिया। fourth  over की अंतिम गेंद में बोलर ने मुझे bowled कर दिया | वो भी एक बेहतरीन wicket की लाइन पर swing होती हुई सीधी गेंद पर |  उस समय team का स्कोर 45 रन था | मैंने उस गेंद पर अपना favourite शॉट straight  drive लगाया ,लेकिन मैं गेंद की लाइन मिस कर गया और bowled  हो गयाजब मैं Pavilion की तरफ लौट रहा था, तब मुझे लग रहा था कि मैंने टीम को बीच रास्ते में छोड़ दिया है। क्योंकि जिस स्थिति में मैं Out हुआ था, वहाँ से एक बड़ी पारी खेली जा सकती थी।

 उस समय पहली बार महसूस हुआ कि क्रिकेट में सिर्फ रन बनाना ही जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि सही समय तक Crease पर टिके रहना भी उतना ही जरूरी है। | पहले मुझे लगा  की चलो बल्लेबाज़ी में ओपनिंग साझेदारी ठीकठाक  हो गई है दूसरे बल्लेबाज़ संभाल लेंगे | लेकिन निराश तो तव शुरू हुई जब अगले तीन बल्लेबाज़ केवल 20 रन  जोड़ पाए अगले तीन overs  में | और हमारा स्कोर 7 ओवर में 65 रन हो गया | टीम दबाव में बिखर गई और 10 ओवर में टीम केवल 90 रन बना सकी और tournament से बाहर हो गए | 

जब आखिरी विकेट गिरा तो कुछ देर तक मैं मैदान के बाहर चुप बैठा रहा। बार-बार वही गेंद दिमाग में घूम रही थी जिस पर मैं bowled हुआ था। उस दिन बहुत  दुख हुआ | लेकिन सीखने को भी काफी कुछ मिला | उस समय मुझे सच में लग रहा था कि मैच अब हमारे नियंत्रण में है। शायद यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी। मैं गेंद को उसकी योग्यता के हिसाब से नहीं, बल्कि अपने आत्मविश्वास के हिसाब से खेलने लगा था। आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि कई बार खिलाड़ी गेंद से नहीं, बल्कि अपनी जल्दबाज़ी से आउट होता है।

फिर क्या सीखा?

उस दिन क्रिकेट के बारे में एक नई बात पता चली कि practice match में खेलने और किसी बड़े टूर्नामेंट में खेलने में दिन रात का अंतर होता है | practice मैच में आउट होने का डर ,scoreboard का दबाव और टीम की उमीदें नहीं होती | और गलती होने पर अगली बाल खेलने को  मिल जाती है |

 मगर real match situation में ऐसा नहीं होता | वहाँ हर बाल की कीमत होती है , wicket खोने का डर होता है, और टीम उम्मीद करती है की आप मैच जीता कर आएंगे | मुझे यह भी समझ आया कि Practice हमें Shot खेलना सिखाती है, लेकिन Match हमें Decision लेना सिखाता है। कई खिलाड़ी शानदार Shot खेल सकते हैं, लेकिन सही समय पर सही Shot चुनना ही उन्हें बेहतर खिलाड़ी बनाता है।

                                                                       

इस समस्या को कैसे सुधारें?

1. Practice को Match जैसा बनाइए

  • Wicket की कीमत रखिए।

  • Target बनाइए।

  • Pressure Situation बनाइए।

2. हर Ball को नई Ball समझिए

पिछली Ball अच्छी थी या खराब, इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए।

ध्यान सिर्फ अगली Ball पर रखें।

3. Shot से पहले Situation को पढ़िए

अपने आप से पूछिए:

  • Ball नई है या पुरानी?

  • Field कहाँ लगी है?

  • Team की स्थिति क्या है?

4. Boundary की जल्दी मत कीजिए

अधिकांश Wicket खराब Technique से नहीं, बल्कि जल्दबाज़ी से गिरते हैं।

                                                                              

युवा क्रिकेटर नेट्स में बल्लेबाजी का अभ्यास करते हुए 
Practice में सीखी गई छोटी चीज़ें मैच में बड़ा फर्क पैदा करती हैं।

बड़े Players से सीख

Virat Kohli, Rahul Dravid और MS Dhoni जैसे Players हर Ball पर Hero बनने की कोशिश नहीं करते।

वे सही Ball का इंतजार करते हैं।इसी कारण वे लंबे समय तक Crease पर टिकते हैं। यही कारण है कि वे दबाव वाली परिस्थितियों में भी लंबे समय तक टिककर टीम को मैच जिताने में मदद करते हैं। इससे हमें ये सीख मिलती है कि हमें अलग - अलग शॉट्स की प्रैक्टिस के साथ मैच को अंतिम समय तक ले जाने की प्रैक्टिस बचपन से ही सीखाना चाहिए |                                                               

क्या सिर्फ ज्यादा Practice करने से Match जीते जा सकते हैं?

हम बचपन से एक बात सुनते आए हैं —"practice makes a man perfect" |   

इस बात को झुटलाया नहीं जा सकता | लेकिन practice के साथ - साथ  match awareness भी ज़रूरी है, क्युकी प्रैक्टिस से हम किसी भी शॉट को परफेक्ट बना सकते है, लेकिन मैच किस स्तिथि में है हमें मालुम होना चाहिए | क्युकी उसी स्तिथि के अनुसार हमें cricketing शॉट का चयन करना situation की डिमैन्ड को पूरा करना टीम को जीत की राह पर लेजा सकते है |  कभी जब target बहुत ज्यादा हो और हम केवल run a ball खेलेंगे तो runrate  बढ़ जायेगा | जिससे मैच हाथ से निकल  सकता है |

 बड़े प्लेयर जैसे dhoni ,virat kohli कभी भी ज्यादा  pressure में नहीं आते | वे गेम को read करते है कि मैच इस वक्त किस स्तिथि में है और अगर fours और sixes नहीं लगते वे सिम्पल single -doubles में मैच को अंतिम overs तक ले जाते है | जिससे टीम एक मजबूत स्तिथि में पहुँचती है | इसका मतलब pressure handling भी एक skill है जिसे वक्त के साथ cricketers को सीखना चाहिए | जोकि केवल ज्यादा से ज्यादा मैच practice से ही संभव है | मैच practice  से अभिप्राय  है ज्यादा से ज्यादा क्रिकेट मैच खेलना | ना कि सिर्फ nets  में ही प्रैक्टिस करना | 

निष्कर्ष

जब Practice में कोई Shot शानदार चलता है और Match में वही Wicket बन जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी Technique खराब है।

अक्सर कारण होता है:

  • दबाव

  • जल्दबाज़ी

  • गलत Decision

  • Situation को न समझना

याद रखिए:

"क्रिकेट में सिर्फ अच्छा Shot खेलना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सही समय पर सही Shot खेलना उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।"

 आप cricket  में improve करना चाहते है तो नीचे दिए गए articles भी पद सकते है -

 "क्रिकेट में डर कैसे खत्म करें? प्राणायाम से मेरा असली अनुभव"

''क्रिकेट में एकाग्रता कैसे बढ़ाएं? 3 वैज्ञानिक तरीके ''

 FAQ (frequently asked questions )

Practice में अच्छा Shot Match में क्यों नहीं चलता?

Practice और Match की परिस्थितियाँ अलग होती हैं। Match में दबाव, scoreboard और bowler की रणनीति decision making को प्रभावित करती है।

क्या सिर्फ ज्यादा Practice करने से Match जीते जा सकते हैं?

नहीं, Practice के साथ Match awareness, pressure handling और decision making भी जरूरी है।

Match में Shot Selection कैसे बेहतर करें?

Ball की line-length, field placement और match situation को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

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