"मैच में घबराहट क्यों होती है? 90% क्रिकेटर ये गलती करते हैं (मेरा अनुभव)"
प्रस्तावना
दोस्तों आप सभी क्रिकेट प्रेमियों को मेरा नमस्कार !
अगर आप क्रिकेट खेलते हैं, तो आपने एक चीज़ जरूर महसूस की होगी
कि जैसे ही मैच शुरू होता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है।सच बताऊँ तो मैच शुरू होने से पहले मेरे हाथ भी कई बार ठंडे पड़ जाते थे और दिल बहुत तेज धड़कता था। उस समय समझ नहीं आता था कि मैं इतना nervous क्यों हो रहा हूँ, जबकि practice में सब सही चलता था।
हाथ थोड़ा कांपने लगता है, दिमाग में बहुत सारे विचार आने लगते हैं और अचानक से वही खिलाड़ी जो practice में शानदार खेलता है, मैच में struggle करने लगता है।
मेरे साथ भी यही होता था।
मैं practice में बहुत confident रहता था, लेकिन जैसे ही मैच में उतरता था, अंदर से एक अजीब सी घबराहट शुरू हो जाती थी।
तब मुझे लगता था कि शायद मुझमें skill की कमी है, लेकिन धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि समस्या skill में नहीं, बल्कि सोच (mindset) में थी।
घबराहट क्यों होती है?
मैंने कई बार यह भी महसूस किया है कि जब हम मैदान में उतरते हैं, तो हम खेल से ज्यादा अपने दिमाग में चल रही बातों से लड़ रहे होते हैं। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर एक अलग ही संघर्ष चल रहा होता है। यही संघर्ष धीरे-धीरे घबराहट को और बढ़ा देता है।हम अक्सर सोचते हैं कि घबराहट इसलिए होती है क्योंकि सामने अच्छा bowler है या मैच बड़ा है।
लेकिन असली कारण कुछ और होता है:
लोग क्या सोचेंगे
अगर मैं fail हो गया तो
मुझे अच्छा खेलना ही है
ये सारे विचार हमारे दिमाग को भर देते हैं।
और जब दिमाग भर जाता है, तो फोकस अपने आप खत्म हो जाता है।
बाहर से देखने पर सब सामान्य लगता है, लेकिन अंदर ही अंदर ऐसा लगता है जैसे दिमाग में बहुत शोर हो रहा हो। यही शोर हमें असली खेल से दूर कर देता है |
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90% क्रिकेटर यही गलती करते हैं
मैंने अपने खेल में एक common चीज़ notice की —
मैं हमेशा result के बारे में सोचता था।
“मुझे रन बनाने हैं”
“मुझे आउट नहीं होना है”
और यही सबसे बड़ी गलती थी।
क्योंकि जब आप result के बारे में सोचते हैं, तो आप present moment से हट जाते हैं।
और क्रिकेट ऐसा खेल है जहाँ:
एक छोटी सी distraction = एक बड़ी गलती
मेरा अनुभव (Real Moment)
एक बार मैं मैच खेल रहा था और मैं सिर्फ यही सोच रहा था कि मुझे अच्छा खेलना है।
पहली गेंद आई और मैं shot खेलते समय confident नहीं था —
और मैं आउट हो गया।
उस दिन मुझे बहुत बुरा लगा।
लेकिन उसी दिन मैंने एक चीज़ notice की:
मैं गेंद पर नहीं, अपने डर पर ध्यान दे रहा था।उस दिन आउट होने के बाद मैं कुछ देर तक चुप बैठा रहा और सोचता रहा कि गलती कहाँ हुई। तब पहली बार मैंने महसूस किया कि मैं गेंद से ज्यादा अपने डर से लड़ रहा था।
और यहीं से मेरी सोच बदलनी शुरू हुई।
असली समाधान क्या है?
मैंने धीरे-धीरे एक simple rule अपनाया:
“सिर्फ इस गेंद पर ध्यान दो”
न पिछले शॉट की चिंता
न अगले ओवर की सोच
सिर्फ अभी जो हो रहा है, उसी पर ध्यान।
शुरुआत में ये आसान नहीं था, लेकिन practice से ये आदत बन गई।
एक छोटी सी technique (Game Changer)
शुरू में ये चीज़ मुझे थोड़ी अजीब लगी, लेकिन जब मैंने इसे 2–3 मैच में try किया, तब मुझे इसका असली असर समझ आया। जब भी मैं मैदान में उतरता हूँ:
मैं 1–2 गहरी सांस लेता हूँ
और खुद से कहता हूँ:
“Relax… सिर्फ खेलो”
इससे मेरा दिमाग तुरंत शांत हो जाता है और मैं overthinking से बाहर आ जाता हूँ।
क्रिकेट में इसका असर
जब मैंने अपने दिमाग को कंट्रोल करना शुरू किया, तो मेरे खेल में ये बदलाव आए:
फोकस अपने आप बढ़ गया
decision clear होने लगे
डर कम हो गया
अब मैं मैच में खेल को enjoy करने लगा था।
IPL से क्या सीख सकते हैं?
जब मैं IPL देखता हूँ, तो सिर्फ shots नहीं देखता, बल्कि ये notice करता हूँ कि खिलाड़ी हर गेंद के बाद खुद को कैसे संभालते हैं।अगर आप IPL के खिलाड़ियों को ध्यान से देखेंगे, तो पाएंगे कि वे दबाव में भी शांत रहते हैं।
वे result के बारे में नहीं सोचते
वे सिर्फ उस गेंद पर focus करते हैं |
यही कारण है कि वे बड़े मंच पर भी शानदार प्रदर्शन करते हैं।
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एक सच्चाई जो हर खिलाड़ी को जाननी चाहिए
घबराहट बुरी चीज़ नहीं है।
असली समस्या है —
घबराहट के साथ गलत सोचना।
अगर आप अपनी सोच को सही कर लेते हैं, तो घबराहट भी आपकी ताकत बन सकती है।
निष्कर्ष
अगर आप भी मैच में घबराहट महसूस करते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
ये हर खिलाड़ी के साथ होता है।
लेकिन फर्क इस बात से पड़ता है कि आप उस घबराहट को कैसे handle करते हैं।
मैंने खुद ये महसूस किया है कि जब आप present में रहते हैं और ज्यादा नहीं सोचते, तो आपका खेल अपने आप बेहतर हो जाता है।अगर आप भी मेरी तरह कभी मैदान में घबराहट महसूस करते हैं, तो समझ लीजिए कि आप अकेले नहीं हैं। हर खिलाड़ी इस दौर से गुजरता है, फर्क सिर्फ इतना है कि कौन इसे समझकर आगे बढ़ता है।
इसलिए अगली बार जब आप मैदान में उतरें, तो सिर्फ एक बात याद रखें:
“सिर्फ इस गेंद पर ध्यान दो”
क्योंकि अंत में वही खिलाड़ी सफल होता है,
जो अपने दिमाग को संभाल पाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: मैच में घबराहट क्यों होती है?
उत्तर: ज्यादा सोचने और result पर ध्यान देने के कारण घबराहट होती है।
प्रश्न: क्रिकेट में overthinking कैसे रोकें?
उत्तर: वर्तमान गेंद पर ध्यान देकर और सांस को नियंत्रित करके overthinking कम की जा सकती है।
प्रश्न: क्या घबराहट performance को खराब करती है?
उत्तर: हाँ, अगर उसे सही तरीके से handle न किया जाए तो performance पर असर पड़ता है।
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